TREATMENT OF CONTAGIOUS BOVINE PLEUROPNEUMONIA ( C.B.P.P. )

Synonyms- CBPP , Lung plague , Lung sickness .

सी.बी.पी.पी. गायों में पाया जाने वाला एक अत्यधिक संक्रामक रोग है , जिसमें फेफड़े व फेफडे को घेरे रहने वाली झिल्ली प्लुरा प्रभावित होती है यह आस्ट्रेलिया , युरोप , अफ्रिका व न्युजीलैण्ड में अधिक पाया जाता है । भारत में यह रोग पूर्वी राज्य असम , अरूणाचल प्रदेश , मिजोरम में अधिक पाया जाता है ।

Morbidity – 100 % , Mortality – 50 %

हालांकि यह प्रमुख रूप से गायों का रोग है लेकिन कभी – कभी भैंस , ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों की याक गाय , जंगली भैंस , बारहसिंगा जैसे पशुओं में भी पाया जाता है । सबसे अधिक ब्रह्मपुत्र नदी की घाटी तथा आसपास के चरागाहों में पाया जाता है । हालांकि यह किसी भी मौसम में हो सकता है लेकिन रोग का प्रकोप बारिश के दिनों में अधिक होता है ।

ETIOLOGY OF CONTAGIOUS BOVINE PLEUROPNEUMONIA ( C.B.P.P. )

ETIOLOGY– Mycoplasma mycodies var mycodies .

यह जीवाणु वातावरण में गर्मी , तेज धूप तथा कोई भी जीवाणुनाशक से नष्ट हो जाते हैं । रोग का फैलाव रोगी पशु के सम्पर्क में आने से सांस ( inhalation ) द्वारा होता है । जो पशु एक बार रोग से ठीक हो जाते हैं , वे तीन साल तक केरियर की तरह दुसरे पशुओं में रोग फैलाते हैं ।

PATHOGENESIS OF CONTAGIOUS BOVINE PLEUROPNEUMONIA ( C.B.P.P. )

रोगी पशु की सांस में असंख्य जीवाणु रहते हैं , इसलिए पशु की सांस के सम्पर्क में आते ही अन्य स्वस्थ पशु को इन्फैक्शन हो जाता है । इसके अलावा मूत्र में भी भारी संख्या में जीवाणु निकलते है , इसलिए मूत्र की गंध से भी इन्फेक्शन हो जाता है ।

The organism enter in body by inhalation → septicaemia localization in lang and pleura Development of lobar pneunomia , Pleurisy and pleuritis → Anorexia → Toxaemia → DEATH .

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SYMPTOMS OF CONTAGIOUS BOVINE PLEUROPNEUMONIA ( C.B.P.P. )

  • इन्क्युबेशन पीरियड – 3-6 सप्ताह एकाएक तेज फीवर ( 105 डि.फा. ) , दूध में कमी ।
  • खाना बंद , जुगाली करना भी बंद , पशु काफी सुस्त हो जाता है ।
  • खांसी , थोरेसिक भाग में दर्द , दर्द के कारण चलना फिरना कम , थोरेक्स में दर्द के कारण पशु अगले पैर चौड़े कर खड़ा रहता है । ( abducted elbow )
  • कमर बीच में से दब जाती है । जबकि सिर व गर्दन सीधी रखता है ।
  • सांस के दौरान गर्र – गर्र की आवाज , नथूने फैले हुए . तथा तेज सांस ।
  • ऑस्कलटेशन

– Early stage – Dry rates

– Later stage – Fluid sound and gurgling moist rales

  • गले में अडिमा की सूजन होना , जो कभी – कभी नीचे अगले पैरों तक उतर जाती है ।
  • गंभीर स्थिति में 7-12 दिन के अन्दर रोगी की मृत्यु हो जाती है । जो एनिमल्स बच जाते हैं उनके हल्की खांसी व सांस सम्बन्धी तकलीफ बनी रहती है । कमजोर भी हो जाते हैं तथा लम्बे समय तक रोग का इन्फेक्शन अन्य स्वस्थ पशुओं में फैलाते रहते हैं । विदेशों में ऐसे पशुओं को खत्म ( slughter ) कर दिया जाता है ताकि रोग अधिक न फैले ।

DIAGNOSIS OF CONTAGIOUS BOVINE PLEUROPNEUMONIA ( C.B.P.P. )

  • History- लम्बा इन्कुबेशन पीरियड / सी.बी.बी.पी में इन्फेक्शन होने के केई दिनों बाद रोग के लक्षण प्रकट होते हैं ।
  • Symptoms- इसमें रेस्पिरेटरी सिस्टम के खास लक्षण होते हैं ।
  • Intradermal test , CFT , PM . changes and culture test
  • Differential diagnosis – Pneumonia , H.S. Parastic pneumonia .

TREATMENT OF CONTAGIOUS BOVINE PLEUROPNEUMONIA ( C.B.P.P. )

  • Antibitotics
  • Sulpha and Penicillin कम असरदार ।
  • Oxytetracycline , Chloramphenicol – अधिक असरदार ।
  • Tylosin tartrate – 10 mg / kg . b.wt. I / M – दिन में दो बार , तीन दिन दें ।
  • Spiramycin and Lincomycin – 10-50 mg / kg b.wt. दिन में एक बार , तीन दिन तक दें ।

CONTROL OF CONTAGIOUS BOVINE PLEUROPNEUMONIA ( C.B.P.P. )

  • रोगग्रस्त पशुओं को खत्म ( slaughter ) कर देना चाहिए । यही इसकी रोकथाम की एक मात्र प्रभावी उपाय है । विदेशों में ऐसा ही किया जाता है , लेकिन भारत में यह फिलहाल संभव नहीं है ।
  • पशु बाड़ों को साफ रखें , रोगी व रोगवाहक ( carrier ) पशुओं को अलग रखें ।
  • वैक्सीन – रोग बचाव हेतु वैक्सीनेशन कराएं ।

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