पेट दर्द का होम्योपैथिक उपचार । Homeopathic treatment for stomach pain

पेट में कई कारणों से दर्द हो सकता है । भारी चीज खाने से और उनके ठीक न पचने के कारण पेट में मरोड़ व ऐंठन होने लगती है । वायु के कारण भी पेट में दर्द हो जाता है । हवा का न निकलना , डकार का न माना व पेट का फूल जाना – इसके लक्षण होते हैं । कभी – कभी सर्दी लग जाने से भी पेट में दर्द हो जाता है । पेट में कीड़े व कब्जियत होने से भी दर्द रहता है । इन सत्र दर्दो का मूल कारण पाचनक्रिया की गड़बड़ी ही है । इसलिए पेट में दर्द होते ही खाना बन्द कर देना चाहिए और गर्म पानी पीना चाहिए । सर्दी का ख्याल हो तो पेट को सेंकना चाहिए । जब तक दर्द रहे , कुछ नहीं खाना चाहिए । दर्द मिट जाने पर पहले दूध आदि तरल चीजें लेनी चाहिए । फिर भोजन करना चाहिए । लक्षणानुसार निम्नलिखित दवाएं देनी चाहिए ।

  • नक्सवोमिका 6,30- यदि कब्ज के साथ पेट दर्द हो ।
  • कोलोसिन्य 6 , 30- यदि नाभि के चारों ओर तीव्र वेदना हो ।
  • लाइकोपोडियम 30- अफरा , अजीर्ण , अधोवायु न निकलना आदि शिकायतों के साथ होने वाले पेट दर्द में ।
  • कैमोमिला 12 , 30- आमाशय , पेट और नाभि के समीप भयानक कटन के साथ दर्द , मुँह से लार अधिक आना , कमर में टूट जाने जैसा दर्द आदि लक्षणों में ।
  • चायना 30- दुर्बल शरीर वाले लोगों के पेट का दर्द , जिसमें अफरा भी अधिक हो , अपान वायु न खुलना तथा आँथों में खिंचाव आदि लक्षणों में ।
  • सल्फर 12 , 30 – नाभि – शूल , नाभि के समीप तनाव , अफरा , पेट में गड़गड़ाहट , हवा न खुलना आदि पर ।
  • एकोन 12,30- पेट में सख्त दर्द , ऐंठन , आँतों में गड़गड़ाबट , गर्मी का अनुभव , कमर के निचले भाग में दर्द , पेट का स्पर्श करना भी सहन न हो ।
  • मैगनेशिया फास 3 एक्स – चूर्ण या 5 टिकिया खूब गर्म पानी में घोलकर दर्द की तेजी के अनुसार 10-15 मिनट या आधे घण्टे के अन्तर से देते रहें । बहुत से दर्द इसके प्रयोग से थोड़ी देर में ही ठीक हो जाते हैं ।
  • कोलोसिन्थ – नाभि के चारों ओर तेज दर्द , दर्द के मारे रोगी सामने की ओर झुककर दोहरा हो जाता है और दर्द की जगह को हाथ से दबाए रखता है । 30 क्रम में घण्टे या दो घण्टे के अन्तर से दें ।
  • नक्सवोमिका – कब्जियत के साथ दर्द ।
  • लाइकोपोडियम – यदि पेट में अफारा हो और शाम को चार बजे के बाद दर्द बढ़े , वीर्य – नाश के कारण अजीर्ण , पेट में गुड़गुड़ी , नीचे से वायु निकलना ।
  • कैमोमिला – नाभि के चारों ओर मरोड़ , पतले दस्त , रात में व गर्मी में दर्द का बढ़ना ।
  • डायसकोरिया – नाभि के बीच में दर्द शुरू होकर सारे पेट में फैल जाए । पेट से फिर सारे बदन में यहां तक कि उंगलियों तक में फैल जाए । आगे झुकने से दर्द का बढ़ना व पीछे मुड़ने व टेढ़े होने से दर्द का कम होना ।
  • पल्साटीला – चिकनी तली हुई चीजें ज्यादा खाने से दर्द होना , पतले दस्त , प्यास का अभाव , जीभ का सूखना , रोगी जरा सी बात में रो पड़े , स्त्रियों को मासिक धर्म के दिनों में दर्द व अजीर्ण ।
  • प्राइरिस वारस – पेट फूलना , पित्त की के और मरोड़ लेकर दर्द । वैरेट्रम ऐलबम – रात में भोजन के बाद पेट फूलकर दर्द होना । पेट में गुड़ – गुड़ की आवाज होना ।

पेट दर्द , अम्लपित्त का कारण तथा आयुर्वेदिक, घरेलु उपचार ।

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