साइनस का होम्योपैथिक उपचार । Treatment of Sinus

साइनस का अर्थ है ‘ खाली जगह ‘ या ‘ खोल ‘ । माथे में गाल के ऊपर की हड्डी में एक खाली जगह छेद के समान है जिसे फ्रंटल साइनस ( Frontal Sinus ) कहते हैं | गालों पर दोनों तरफ उभरती हुई दो हड्डियां हैं जो भीतर के खाली जगह के द्वारा माथे की हड्डी के खाली जगह से मिली होती है |

सर्दी – जुकाम बिगड़ जाने पर इन खाली जगहों में श्लेष्मा जम जाता है जिससे माथे में दाएं या बाएं हिस्से में या गाल की उभरी हुई हड्डी में दर्द होता है , इसी को साइनस या साइनस का दर्द कहते हैं , जो बिगड़े हुए सर्दी – जुकाम का ही एक रूप होता है । इस रोग मे जुकाम और सिर दर्द दोनों मिले – जुले रहते हैं । इस रोग का होमियोपैथी में शर्तिया इलाज है , जिसके बारे में लक्षण एवं दवाइयां नीचे बतलाए गये हैं ।

साइनस का होम्योपैथिक दवाएं ।

  • भौंहों ( Eyebrow ) के ऊपर या दोनों भौंहों के बीच वाले भाग में दर्द होता हो , यह दर्द माथे के सामने की हड्डी के साइनस ( फ्रंटल साइनस ) तक फैलता हो , साथ ही नाक के जड़ में दर्द होता हो , नाक से कड़ा तार बनने वाला या थक्केदार स्राव निकलता हो – काली बाइक्रोम ( Kali Bi . ) 3X या 30 , दिन में 4 बार ।
  • रोगी को ठंडी हवा तुरंत असर कर जाए , I रोगी सिर को ढक कर रखना चाहे , नाक व आंखों के ऊपर दर्द हो- साइलीशिया ( Silicea ) 200 या 1M सप्ताह में एक बार ।
  • नाक की जड़ के उपर ऐंठन जैसा दर्द हो , सिर दर्द ऐसा हो मानो कोई कील कनपट्टी में चुभा कर निकाली जा रही हो – इग्नेशिया ( Ignatia ) 6 या 30 , दिन में 3-4 बार ।
  • रोगी को बहुत ज्यादा छींक आती हो और नाक से पानी बहता हो , साथ – साथ माथे के आगे वाले भाग में दर्द , नाक से पानी जैसा स्राव निकले सैबाडीला ( Sabadilla ) 3 या 30 दिन में 4 बार I
  • नाक बंद हो जाना , किसी गंध का पता न चलना , रोगी को ठंडी हवा अच्छा लगे , माथे के सामने वाले हिस्से में दर्द , दांया कान तथा दांया जबड़े में दर्द – आयोडियम ( Iodium ) 3 या 30 दिन में 4 बार ।
  • सिर के दायें भाग में दर्द होता हो , सूर्योदय के साथ दर्द शुरू तथा सूर्यास्त के साथ दर्द खत्म हो जाना , सिर के ऊपर से होता हुआ दर्द दायीं आँख तक आये , नाक की पुरानी बीमारी हो – सैंगुनेरिया Sanguinaria can ) 6 या 30 दिन में 4 बार ।
  • सिर के बाएं भाग में दर्द जो बायीं आँख तक आये , रोगी को ऐसा दर्द हो मानो उसका सिर किसी पट्टी से बंधा हुआ हो , नाक के अंतिम भाग से श्लेष्मा निकले जो गले में जाता रहे- स्पाइजेलिया ( Spigelia ) 30 या 6 दिन में 4 बार ।
  • कोई कील सिर में ठोक दी गई हो ऐसा दर्द होना , बायीं ओर का सिर दर्द , बहुत पुराना जुकाम हो , हरा , गाढ़ा श्लेष्मा निकले , नाक के जड़ में दर्द- थूजा ( Thuja ) या इग्नेशिया ( Ignatia ) 30 या 6 , दिन में 4 बार ।
  • सिर दर्द , जुकाम के कारण ललाट में भारीपन महसूस होता हो , बार – बार नाक साफ़ करने की आवश्यकता पड़ती हो पर नाक से कुछ भी न निकले , लगातार छींके आती हो- स्टिकटा ( Sticta ) 6 या 30 दिन में 3-4 बार ।
  • हल्का – हल्का आँखों के ऊपर सिर दर्द , रात को नाक बंद हो जाना लेकिन पुनः दिन को नाक बहने लगे , सिर की चोटी पर कील चुभने जैसा दर्द – नक्स वोमिका ( Nux Vom ) 6 या 30 दिन में 3-4 बार ।
  • बिस्तर से उठते ही सिर दर्द मानो सैंकड़ो हथौड़ियाँ सिर पर चोट कर रही हो , सूर्योदय से सूर्यास्त तक सिर दर्द करना , सिर के आगे ( फ्रंटल साइनस ) दर्द – नैट्रम म्यूर ( Natrum mur ) _30 , दिन में 3 बार ।

साइनस में ध्यान रखने योग्य बातें ।

धूल – मिट्टी से खुद को बचाए रखें । डस्ट एलर्जी भी साइनस की वजह बन सकती है । धुम्रपान नहीं करें । गर्म पानी में तौलिया भिगाकर अपने चेहरे पर रखें , गर्म पेय पदार्थ या गर्म पानी पीना चाहिए ।

इसे पढ़ें – सर्दी – जुकाम और नजला का कारण, लक्षण एवं उपचार । Home treatment of Cold

Leave a Reply

Your email address will not be published.