बच्चों का आँख उठने का होम्योपैथिक उपचार । Homeopathic Treatment For Opthalmia

बच्चों की आँख में धुआँ , तेज रोशनी , हवा का झोंका और सरदी आदि लगने के कारण उनकी आँखें उठ आती हैं । अनेक बार पहले उनकी आँखों के पपटों में ही प्रदाह पैदा होता है , परन्तु इसके इलाज में विलम्ब करने से रोग समूची आँखों में फैल जाता है और बच्चों को इससे बड़ा कष्ट होता है ।

आँख उठने पर पलकों का जुड़ जाना , आँख के भीतर और बाहर लाली , सूजन , आँख से पीब निकलना , रोशनी बरदास्त न होना आदि लक्षण प्रकट होते हैं । रोग शीघ्र आराम न होने पर भूख न लगना , सदा रोते रहना , दिनों दिन रोगियाते जाना , अस्थिरता आदि लक्षण भी प्रकट होते हैं ।

बच्चों का आँख उठने का होम्योपैथिक दवा । Homeopathic medicine for Opthalmia

  • एकोनाइट 30 या 200 (4 बुंद 3 बार) – इस रोग में सबसे पहले इसे ही देना चाहिये । खासकर जब अधिक रोशनी लगने के कारण यह रोग हुआ हो , समूची आँख लाल हो गयो हो और आँख से काफी स्त्राव निकलता हो ।
  • बेलेडोना 30 या 200 (4 बुंद 3 बार) – एकोनाइट के बाद इसे देने से विशेष लाभ होता है । आँख का सफेद भाग बहुत लाल हो जाना , पलकों से खून निकलना , रोशनी बरदाश्त न होना इत्यादि लक्षणों में इसे देना चाहिये ।
  • केमोमिला 30 या 200 (6 बुंद 2 बार)- पपटों का सूजना , उनसे खून निकलना , पलकों का जुड़ जाना और सुबह उनसे पीला पीला पीच निकलना इत्यादि ।
  • प्लसटीला 30 या 200 (2 बुंद 3 बार) – आँख से पीब जैसा बहुत स्राव निकलना , समूची आँख और पपटो के भीतरी भाग में बहुत लाली इत्यादि ।
  • अर्जेन्टम नाइट्रिकम 30 (4 बुंद 2 बार) – पपटों में बहुत सूजन और आँख से मलाई जैसा पीब निकलने की यह बढ़िया दवा है ।
  • युफ्रेशिया ६ या 30 (4 बुंद 3 बार) – आँख में पीब जमा होना और रोशनी बरदाश्त न होना ।
  • एपिस 30 या 200 (4 बुंद 2 बार) – आँख के पपटे और उनके ऊपर सूजन , जलन , जख्म , पीव पड़ना इत्यादि ।
  • कल्केरिया कार्ब 30 या 200 (4 बुंद 3 बार) – आँख के पपटो में सूजन और लाली , रात में पलकों का जुड़ जाना , गण्डमाला धातु , मोटा और थुलथुला शरीर इत्यादि ।
  • सल्फर ३० (6 बुंद 2 बार) – चुनी हुई दबासे पूरा लाभ न होने पर बीच बीच में इसे देना चाहिये ।

आवश्यक सूचना –

बच्चों की आँखें दिन में तीन चार बार या जब जब उनमें पीब भर जाय धो देना चाहिये । धोने के लिये सुसुम पानी या गाय का कच्चा दूध और पानी एक में मिलाकर काम में लाना चाहिये । किसी प्रकार का लोशन व्यवहार करना ठीक नहीं ।

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