पशुओं में टेटेनस ( TETANUS ) का कारण , लक्षण एवं उपचार ।

अन्य नाम – टेटेनस ( TETANUS ) Lock jaw , धनुषटंकार रोग , चांदनी रोग ।

टेटनस ( TETANUS ) होने का कारण क्या है ।

टेटेनस एक संक्रामक रोग है जो क्लॉस्ट्रिडियम टेटेनाई नामक बैक्टीरिया के टॉक्सिन से होता है । इसमें तंत्रिका केन्द्रों के अधिक उत्तेजना के कारण मांसपेशियों में बार – बार अधिक सिकुड़न ( muscle spasms ) से पशु की मौत हो जाती है । इसे धनुषटंकार या चांदनी भी कहते हैं । इसमें अधिकतम ( 80-100 % ) पशुओं की मौत हो जाती है ।

टेटेनस मुख्य रुप से घोड़ों का रोग है लेकिन अन्य प्रजाति के पशुओं में भी यह पाया जाता है । गायों में सबसे कम पाया जाता है । बिल्लियों में टेटेनस नहीं होता है । अन्य पशुओं में भेड़ , बकरी व कुत्तों में अधिक होता है । मनुष्य में भी यह रोग होता है ।

Bacteria – Clostridium tetani . प्रायः ये बैक्टीरिया मिट्टी में अधिक पाये जाते हैं और उस मिट्टी में अधिक पाये जाते हैं जो घोड़ों की लीद ( faeces ) से अधिक दूषित ( contaminated ) होती है । मिट्टी में ये बैक्टीरिया स्पोर ( spore ) बनाकर कई वर्षों तक जिंदा रह जाते हैं । ये 100 ° सें . तापमान के 30-60 मिनट तक सहन कर जाते हैं लेकिन 115° सें . तापमान में 30 मिनट में मर जाते हैं । सामान्य अवस्था में बैक्टीरिया शाकाहारी पशुओं और विशेषकर घोड़ों की आंत में रहते हैं तथा लीद व गोबर के साथ बाहर आते रहते हैं । दूषित लीद व गोबर के मिट्टी में मिलने या खाद के रुप में काम में लेने से टेटेनस बैक्टीरिया बड़े क्षेत्र में फैल जाते हैं । इसके अलावा जंग लगी लोहे की वस्तुओं पर दस वर्ष तक जीवित रह जाते हैं ।

इसे पढें – खुरपका – मुंहपका रोग (FOOT AND MOUTH DISEASE ) के कारण, लक्षण , उपचार एवं होम्योपैथीक इलाज

टेटेनस ( TETANUS )कितने प्रकार के होते हैं । How many types of MODE OF INFECTION

प्रायः निम्न प्रकार के विभिन्न पशुओं में रोग का इन्फेक्शन होता है ।

  • घोड़ा खुरों व पैरों के घाव के जरिए ।
  • गाय ब्याने के बाद योनि ( vagina ) मार्ग द्वारा ।
  • बछड़ा या बकरा ओपन मेथड केस्ट्रेशन द्वारा ।
  • भेड़ , बकरी ऊन कतरने से होने वाले घावों के जरिए ।
  • बछड़ा , बछड़ी नेवल इन्फेक्शन द्वारा ।

गली मौहल्ले , बगीचे की मिट्टी तथा खाद में लम्बे समय तक क्लोस्टूिडियम टेटेनाई वैक्टीरिया जीवित रह कर पशुओं व मनुष्य के लिए रोग का कारण बनते हैं । ठंडे प्रदेशों की अपेक्षा गर्म प्रदेशों में यह रोग अधिक होता है ।

पशुओं में बड़े पशुओं की अपेक्षा छोटे पशुओं में रोग अधिक होता है । रोग के बैक्टीरिया शरीर के घावों के जरिए प्रवेश करते हैं । गहरे तथा ऊपर से बंद घावों में ये जल्दी वृद्धि करते हैं क्योंकि ये बैक्टीरिया बंद घाव की एनएरोबिक कंडीशन में ही व द्धि करते हैं । जो घाव खुले होते हैं तथा ऑक्सीजन के सम्पर्क में रहते हैं यहा ये अधिक बृद्धि नहीं कर पाते हैं ।

और पढ़ें – पाइका ( PICA ) का कारण , लक्षण तथा उपचार ।

टेटेनस ( TETANUS ) के लक्षण क्या है ।

SYMPTOMS- Incubation period – 7 to 30 days

  1. शुरू में जबड़े ( mandible ) में अकड़न ( stiffness ) तथा आहार चबाने की प्रक्रिया धीमी होती है , जबड़े का मुवमेन्ट कम होता है ।
  2. लक्षणों की गंभीरता बैक्टीरिया द्वारा छोड़े गये टॉक्सिन की मात्रा पर निर्भर करती है ।
  3. Prolapse of third eyelid ( membrena nictitance ) – गुलाबी रंग की यह झिल्ली आंख की आधी गोलाई तक फैल जाती है ।
  4. रोग की गंभीरता बढ़ने के साथ पैरों की अकड़न बढ़ जाती है । एनिमल चारों पैरों को अधिक चौड़ा रखकर खड़ा रहता है । सिर व गर्दन भी तनी हुई अवस्था में रहती है । ऐसा लगता है मानो काठ का घोड़ा खड़ा है ।
  5. इस अवस्था में चेहरे की मांसपेशियों में तनाव के कारण घोड़े का मुंह अधिक उत्सुक व सचेत दिखाई देता है ।
  6. कान सीधे खड़े रहते है तथा पूंछ भी सीधी तनी हुई रहती है ।
  7. नथूने फैल जाते हैं तथा मुंह चलना बंद हो जाता है । आहार को मुंह में लेना या चबाना भी असंभव हो जाता है । इसे locked Jaw कहते हैं । ऐसे में मनुष्य द्वारा कोशिश के बाद भी मुंह खोलना मुश्किल हो जाता है ।
  8. मुंह से लार भी गिरती है ।
  9. ठंडी हवा , शोरगुल व छूने से घोड़ा उत्तेजित ( Hyperaesthesia ) हो जाता है । तथा मांसपेशियों में सिकुड़न भी बढ़ जाती है ।
  10. अधिकतर मामलों में कब्ज रहती है तथा युरिन आना कम या बंद हो जाता है ।
  11. चलना , गोलाई में मुड़ना तथा पीछे की ओर चलना मुश्किल हो जाता है ।
  12. बाद में घोड़ा जमीन पर गिर जाता है । अगले पैर आगे की ओर तथा पिछले पैर पीछे की ओर तने हुए रहते हैं जिससे शरीर धनुष के आकार ( opisthotonus ) बन जाता है ।
  13. मांसपेशियों के अधिक सिकुड़ने ( muscle contraction ) व उत्तेजना ( excitement ) के कारण घोड़े के परे शरीर पर खूब पसीना आता है । साथ ही पेट की मांसपेशियों में अकड़न ( spasms ) से खड़ा भी नहीं हो पाता है ।
  14. शुरू में टेम्प्रेचर नॉर्मल होता है , बाद में 108 से 110 डि.फा तक पहुंच जाता है ।
  15. अंत में तेज ऐंठन ( tetanic spasms ) होते है । सांस लेने में भारी तकलीफ होती है और asphyxia के कारण एनिमल की मौत हो जाती है ।

टेटेनस ( TETANUS ) का उपचार :-

टेटेनस में इलाज मुख्य पांच बातों को ध्यान में रखकर किया जाता है ।

  1. टेटनेस बैक्टीरिया की बड़ी तादाद को नष्ट करना – Antibiotics .
  2. बैक्टीरिया के टॉक्सिन को बेअसर करना – Antitoxioid
  3. अकड़ी हुई मांसपेशियों को रिलेक्स करना ताकि सास नहीं रूक सकें – Muscle relaxant
  4. घाव का इलाज – जहा से बैक्टीरिया प्रवेश हुए व वृद्धि कर रहे हैं । – एन्टीसेपिटक
  5. पशु का उचित रख रखाव – Enema , Catheterization , Bedding .

टेटेनस ( TETANUS ) के लिये एंटीबायोटिक्स (Antibiotics ) :-

  • Penicillin – drug of choice ( high doses )
  • Penicillin -G – 3000-10000 IU / lb b.w.t. I / V .
  • Procaine Penicillin – I / M for 3-5days .
  • Long acting Penicillin – 48 lac I / M

टेटेनस ( TETANUS ) के लिये Neutralization of toxin :-

  • Tetanus antitoxin ( TAT ) – Prophylactic and Curative
  • Tetanus toxoid ( T.T. ) – only Prophylactic
  • Inj.TAT – Prophylactic

Horse and Cattle – 1500 to 3000 IU , S / C

Sheep and Goat – 500 to 1500 IU , S / C .

Dogs 250 to 500 IU , S / C .

Inj . TAT – Curative 100 times of dose is given . First injection should be given I/V and subsequently by S / C and I / M .

Horse – 5-10ml

Human – 0.5-1ml .

टेटेनस ( TETANUS ) के लिए Relaxation of Tetani :-

Inj . Chlorpromazine – 1 mg / kg . b.wt.

टेटेनस ( TETANUS ) के लिए Site of Infection :-

घाव की हाइड्रोजन परआक्साइड या लाल दवा के घोल से ड्रेसिंग करें ।

इसे पढ़ें – पशुओं को निगलने ने कठिनाई यानी इसोफेजाइटिस ( OESOPHAGITIS ) के कारण लक्षण तथा उपचार

टेटेनस ( TETANUS ) के लिए Proper Management and Care :-

  • एनिमल को रोशनी की बजाय छाया या अंधेरे में रखें ।
  • Fluid therapy- नॉर्मल सेलाइन , रिंगर लेक्टेट आदि ।
  • Catheterization – नर या मादा एनिमल में केथेटर द्वारा युरिन बाहर निकालें ।
  • यदि आवश्यक हो तो पर्गेटिव या एनिमा भी है ।
  • एनिमल के लिए रेत , भूसा , बोरी या अन्य गद्देदार बिछावन बिछाएं ।

टेटेनस ( TETANUS ) का रोक थाम क्या है।

  • व्याने से पहले व बाद में उस स्थान की अच्छी सफाई रखें ।
  • ऑपरेशन के दौरान सर्टलाइज्ड इंस्ट्रूमेन्ट को काम में लें ।
  • शरीर के छोटे – बड़े घावों की समय पर समुचित ड्रेसिंग करें ।
  • बछड़ों व बकरों का ओपन मेथड से कास्ट्रेशन नहीं करें ।
  • पशुओं को लोहे की तारबंदी के आसपास न बांधे तथा न चाटने दें ।
  • पशु बाड़े या अस्तबल में लोहे की कीलें , खूटों आदि का प्रयोग न करें ।
  • प्रतिवर्ष टेटेनस का टीकाकरण करवाएं- Inj , TAT Horse – 1500-3000 IU , I/M

टेटेनस ( TETANUS ) का होम्योपैथीक उपचार । HOMEOPATHIC TREATMENT OF TETANUS

  • हाइड्रोसाइनिक एसिड ( Hydrocynic acid ) – शरीर में खिंचाव , चेहरा , जबड़ा और पीठ में तनाव , सांस में तकलीफ , मुंह से झाग , पैरों में अकड़न ।
  • लेडम पालुस्ट्रे ( Led . pal ) – जब घाव के कारण टेटेनस हो तो दिन में पांच बार दें ।
  • सिट्रीकनिन ( Strychnine ) – मांसपेशियों का अकड़ जाना , पैर अकड़ कर सीधे हो जाना , गर्दन व कमर धनुष के आकार की हो तो दिन में तीन बार तीन दिन तक दें ।
  • क्युप्रम क्युप्रम मेटालिकम 1000 ( Cuprum Met . 1M ) – मांसपेशियों के जकड़न की शुरूआती अवस्था में जब पशु पैर के झटके मारता हो , ऐंठन हो तो दिन में दो बार तीन दिन तक दें ।
  • बेलाडोना ( Belladonna 1M ) – यदि टेटेनेस ग्रस्त रोगी का मुंह अकड़न से बंद हो , धनुषटंकार शरीर , घूरती हुई आंखें , तेज कंपन , आंखों की पूतलियां फैली हुई हों तो हर घंटे दें ।
  • कॉलचिकम ( Colchicum ) – पशु के लगातार लेटे रहने की स्थिति में टिम्पेनी होने पर हर आधा घंटे बाद पांच बार दें ।

इसे पढें – पशुओं में चोक (CHOKE) के कारण, लक्षण एवं उपचार

Leave a Reply

Your email address will not be published.