हाइड्रोसिल का होम्योपैथिक उपचार । Homeopathy treatment of HYDROCELE

परिचय :-
किसी कारण से अंडकोष में पानी जमा हो जाने से अंडकोष की थैली फूल जाती है जिसे हाइड्रोसिल कहते हैं। इस रोग का एक सामान्य लक्षण यह है कि पूर्णिमा व एकादशी के दिनों में यह बढ़ जाता है अर्थात अंडकोष अधिक फुल जाता है और अन्य दिनों में कम रहता है। जब अंडकोष में अधिक पानी भर जाता है तो अंडकोष गुब्बारे की तरह फुला हुआ दिखाई देता है। अंडकोष में अधिक पानी भर जाने पर कभी-कभी नश्तर लगवाकर पानी को निकलवाना पड़ता है।

हाइड्रोसिल का कारण क्या है :-

अंडकोष की सूजन या पानी भरना कई कारणों से होता है। अंडकोष पर चोट लगना, अंडकोष में दर्द होना, उसके नसों का सूज जाना, स्वास्थ्य खराब होना या सूजन आना आदि। अंडकोष की सूजन वंशानुगत भी हो सकता है। कभी-कभी अंडकोष की सूजन में दर्द बिल्कुल भी नहीं होता परन्तु वह बढ़ता रहता है।

वंशानुगत रूप से अंडकोष में पानी भरने पर औषधियों का प्रयोग :-

  1. ऐब्रोटेन :- ऐब्रोटेन औषधि की 3 से 30 शक्ति का प्रयोग बच्चों के अंडकोष की सूजन को ठीक करने के लिए किया जाता है।
  2. ब्रायोनिया :-

यदि किसी बच्चे का अंडकोष जन्म से बढ़ा हुआ हो तो उसके इस रोग को ठीक करने के लिए ब्रायोनिया औषधि की 3 शक्ति का सेवन हर 4 घंटे के अंतर पर कराना चाहिए।
चोट लगने के कारण अंडकोष की सूजन होने पर आर्निका 3 शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है।
अन्य कारणों से अंडकोष बढ़ने या पानी भरने पर औषधियां का प्रयोग:-

  1. आर्निका :- यदि चोट लगने के कारण अंडकोष बढ़ गया हो तो आर्निका औषधि की 12 शक्ति का सेवन 4-4 घंटे के अंतर पर करने से लाभ मिलता है।
  2. ब्रायोनिया :- अंडकोष में सूजन आने पर यदि गोली लगने की तरह दर्द हो या बैठे रहने पर सुई चुभने की तरह दर्द हो तो ब्रायोनिया औषधि का उपयोग करना लाभकारी होता है।
  3. ग्रैफाइटिस :-

अंडकोष व अण्ड में सूजन आने पर ग्रैफाइटिस औषधि का प्रयोग किया जा सकता है। इस औषधि की 30 शक्ति का सेवन करना चाहिए।
अंडकोष की त्वचा का सूख जाना, जननेन्द्रियां सूज जाना, बाईं अंडकोष में जलन होना, अंडकोष की त्वाच पर फुन्सियां होना एवं कभी-कभी इसके साथ स्वप्नदोष होना आदि। इस तरह के लक्षणों में ग्रैफाइटिस औषधि की 6 या 30 शक्ति का सेवन करना उचित होता है।

  1. रोडोडेन्ड्रन :- अंडकोष की नई सूजन में इस औषधि का प्रयोग किया जाता है विशेषकर दाईं ओर के अंडकोष की सूजन में। यदि अंडकोष की नईं सूजन में दर्द हो तो ऐसे लक्षणों में रोडोडेन्ड्रन औषधि की 3x मात्रा या 6 शक्ति लेना चाहिए। यदि इस औषधि से लाभ न हो तो रस-टॉक्स औषधि का सेवन करना चाहिए।
  2. साइलीशिया :-

अंडकोष में पानी भरने या अंडकोष में सूजन आने के साथ यदि जननांगों पर पसीना आता हो, खुजली हो, सिर पर पसीना आए, रोगी का शरीर पतला-दुबला हो और वह शीत प्रकृति का हो तो उसे साइलीशिया औषधि की 30 शक्ति का सेवन करना चाहिए।
यदि अंडकोष की सूजन पूर्णिमा और अमावस्या को बढ़ता हो तो साइलिसिया औषधि की 6 शक्ति का प्रयोग करने से लाभ मिलता है।

  1. स्पंजिया :- यदि अंडकोष में पानी भर गया हो और वह फुलकर लाल रंग हो गया हो और ऐसा महसूस हो जैसे अंडकोष टपक पड़ेगा। इस तरह के लक्षणों में स्पंजिया औषधि के मूलार्क की 2x मात्रा या 3 शक्ति का उपयोग करना चाहिए।
  2. रस-टॉक्स :- बरसात के मौसम में या सर्दी के मौसम में अंडकोष में दर्द होने पर रस-टॉक्स औषधि की 30 शक्ति का उपयोग किया जा सकता है।
  3. हैमामेलिस :- अंडकोष के साथ शुक्ररज्जु की शिराएं बढ़ने पर हैमामेलिस औषधि की 1x मात्रा का सेवन करना हिताकरी होता है।
  4. रोडोडेन्ड्रन :- यदि अंडकोष में जल भरने की बीमारी नई हो, दाईं कोष रोगग्रस्त हो एवं दर्द हो और अंधरे या वर्षा से पहले दर्द बढ़ता हो तो ऐसे में रोडोडेन्ड्रन औषधि की 3x मात्रा या 6 शक्ति प्रयोग करना लाभकारी होता है।
  5. पल्सेटिला :- इस औषधि का प्रयोग अंडकोष के रोग में किया जाता है विशेषकर बाएं अंडकोष रोगग्रस्त होने पर। यदि अंडकोष में दर्द न हो और वह धीरे-धीरे बढ़ता व फूलता जा रहा हो तो पल्सेटिला औषधि की 30 शक्ति का सेवन करते रहने से दर्द में आराम मिलता है और सूजन दूर होती है।
  6. ऊपर बताए गए औषधियों के प्रयोग के अतिरिक्त बीच-बीच में प्रयोग की जाने वाली अन्य औषधियां :- रस-टॉक्स की 6, एपिस की 6, सल्फर की 30 या आयोड की 6 शक्ति आदि।

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