बच्चे का शरीर फटने का होम्योपैथिक उपचार । Homeopathic Treatment For Excoriations

जन्म होने के बाद मोटे और थुलथुले शरीर के बच्चों का बदन फटकर कभी कभी उनके शरीर में जख्म हो जाते हैं । चमड़े की खराबी या सफाई न रखने के कारण यह रोग होता है । यह रोग होने पर पीठ , बगल , पट्ठे आदि स्थानों में पानी जैसा लगकर वहाँ जख्म हो जाते हैं ।

बच्चों का शरीर फटने का होम्योपैथिक दवा । Homeopathic medicine for Excoriations

  • केमोमिला 30 या 200 ( 2 बुंद 3 बार ) – रोगके आरम्भ में इससे काफी लाभ होता है ।
  • मक्युरियस 6 , 30 या 200 ( 2 बुंद 3 बार ) – चमड़े में पीलापन दिखाई दे और केमोमिला से लाभ न हो तो इसे देना चाहिये ।
  • कल्केरिया कार्ब 6 , 200 या ३० ( 2 बुंद 3 – 4 बार )- मोटे और थुलथुले शरीरवाले बच्चों को इससे विशेष लाभ होता है ।
  • लाइकोपोडियम 6 या 30 ( 2 बुंद 3 – 4 बार ) – जख्म में बदबू , उससे जरामें खून निकलना , मल कठिन और कष्टके साथ निकलना , बारंबार रोग का आक्रमण इत्यादि ।
  • कार्बोवेज 30 या 200 – गरमी के दिनों में बदन फटने की यह बढ़िया दवा है ।
  • ग्रेफाइटिस 30 या 200 ( दिन में 3 बार ) – कानके पीछे जख्म और उससे चिपचिपा रस निकालना ।
  • सीपिया 30 या 200 ( 2 बुंद 2 बार ) – किसी स्थान में कुछ लगते ही वहाँ जख्म हो जाय तो इसे देना चाहिए ।
  • सल्फर 30 या 200 (2 बुंद केवल सुबह) – शरीर में पीच भरी फुन्सियाँ और ज़ख्मों में खुजली होने पर इसे देना चाहिये ।

आवश्यक सूचना –

बदन हमेशा साफ रखना चाहिये । कैलेण्डुला लोशन या सुसुम पानी से बिना रगड़े बदन धो देना और धोनेके बाद अच्छी तरह पोछ देना लाभदायक है ।

इसे देखें – बच्चों के पेट में शूल (दर्द) का होम्योपैथिक उपचार । ( Colic of Infant )

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