बच्चों के दाँत निकलने का होम्योपैथिक उपचार Homeopathic treatment of Dentition

दाँत निकलने के समय बच्चों को अनेक प्रकार के रोग हो जाते हैं और उनके कारण उन्हें न केवल तकलीफ ही होती है , बल्कि कभी कभी उनके प्राणों पर भी आ बनती है । पहले पहल नीचे के मसूढ़े में सामने के दो दाँत निकलते हैं । इसके बाद दो वर्ष के अन्दर प्रायः समस्त दाँत निकल आते हैं । बच्चों के यह दाँत दूध के दाँत कहलाते हैं और इनकी संख्या २० की होती है । कभी कभी दाँत निकलने के समय में कमी – बेशी भी दिखायी देती है । किसी के वर्ष पूरा हो जाने पर भी पहले दो दाँत नहीं निकलते और किसी के जन्म होनेके दो ही तीन सप्ताह बाद निकल आते हैं । किसी किसी बच्चे के जन्म होने पर पहले से ही दो दाँत मौजूद रहते हैं , परन्तु ऐसे उदाहरण बहुत कम देखे जाते हैं ।

दाँत निकलने के समय बच्चे माता पिता का स्तन काटते हैं , जोर से दबा रखते हैं और फिर छोड़ देते हैं । जो कुछ पाते हैं , उसे ही काटने लगते हैं । इसके अतिरिक्त कमजोरी , बुखार , खाँसो , पतला दस्त , कै , अस्थिरता , अनिद्रा , मसूढ़े में उत्तेजना , मसूढ़ों में लाली , फूलन और दर्द , कभी कभी आक्षेप इत्यादि उपसर्ग उपस्थित होते हैं ।

इसे पढ़ें – बच्चे का बहुत रोने का कारण, लक्षण और होम्योपैथिक उपचार । Treatment of Crying of Infants

बच्चों के दांत निकलने का होम्योपैथिक दवा(Homeopathic medicine for Dentition :–

  • एकोनाइट 6 या 30 ( 4 बुंद दिन में 3 बार ) – बच्चे का रोना चिल्लाना , बुखार , बहुत बेचैनी और अनिद्रा , दर्द इत्यादि ।
  • बेलेडोना 6 या 30 ( 4 बुंद दिन में 3 बार ) – दाँत निकलने के कारण आक्षेप , आक्षेप के बाद गहरी नींद , नींदसे चौक पड़ना , चारों ओर इस तरह देखना मानों दहशत खा गया है , आँख का तारा विस्तृत , स्थिर दृष्टि , समूचा शरीर अकड़ा हुआ , तलहत्थी और कनपटी गरम इत्यादि ।
  • कल्केरिया कार्ब 30 या 200 ( 2 बुंद दिन में 3 बार ) – मोटे और थुलथुले शरीर वाले बच्चों को दाँत निकलने में देरी होनेपर इसे देना चाहिये ।
  • इपीकाक ६ या ३० ( 4 बुंद दिन में 3 बार ) – मिचली और के साथ ही पतले दस्त , भिन्न भिन्न रंगका मिला हुआ मल ।
  • केमोमिला ६ या 30 ( 4 बुंद दिन में 3 बार ) – यह दाँत निकलने के समय समस्त बीमारियों में काम देता है । रात के समय बहुत बेचैनी , चिड़चिड़ाना , बारंबार पानी पीना , आक्षेप या खींचन , गोदी में चढ़कर घूमने की इच्छा , खासकर नींद के समय , जरा भी आवाज होते ही जाग पड़ना , बदन में साधारण गरमी , आँखों में लाली , एक गाल लाल और दूसरा फोका , खास कष्ट , छाती जकड़ी हुई , खाँसी , मुँह सूखा हुआ और गरम , हरे पीले पानी दस्त , रातके समय दस्तों का बढ़ना , दस्त में बदबू इत्यादि ।
  • साइना ३० या २०० ( 2 बुंद दिन में 3 बार ) – रातके समय बिछौने में पेशाब कर देना , सोते में दाँत किमिड़ाना , तलपेट फूला और कड़ा , नाक खुज लाना , सूखी खाँसी इत्यादि कृमि जैसे लक्षणोंमें इसे देना चाहिए ।
  • कोफिया 6 या 30 ( 2 बुंद दिन में 3 बार ) – बहुत उत्तेजना , नींद बिलकुल न आना , कभी भयभीत और कमी प्रसन्न मालूम होना , थोड़ा बुखार इत्यादि ।
  • इग्नेशिया 30 या 200 ( 2 बुंद दिन में 3 बार ) – किसी एक अंगमें आक्षेप , बदनमें दाह , कभी कभी पसीना , हलकी नींद और उससे चौंककर रोना चिल्लाना ।
  • मर्क्युरियस सल. 30 या 200 ( 2 बुंद दिन में 3 बार ) – मसूढ़े लाल , हरे दस्त , बहुत काँखना , आँव और खून मिले दस्त , पेट फूला और कड़ा , बहुत लार निकलना , रात में तकलीफका बढ़ना इत्यादि ।
  • सल्फर ३० या 200 ( 2 बुंद दिन में 3 बार ) – सफेद सफेद या खट्टी गन्ध युक्त गरम दस्त , मल द्वारमें जख्म हो जाना इत्यादि ।
  • ब्रायोनिया ६ ,३० या 200 ( 2 बुंद दिन में 3 से 4 बार ) – कब्जियत , खाँसी , कुछ खाने पर तुरन्त कै हो जाना , बच्चे का चुपचाप पड़े रहना , प्यास इत्यादि ।
  • हायोसायमस 6 या 30 – मुँह में उँगली डालकर काटना और अनजान में पीले रंग का दस्त ।
  • नक्सवोमिका ६ , ३० या 200 ( 4 बुंद दिन में 3 से 4 बार ) – कब्जियत , भूख न लगना , रोना , बारम्बार आँव मिला दस्त , रातमें रोगका बढ़ना ।
  • पोडोफा़ईलम 30 या 200 ( 2 बुंद दिन में 3 बार ) – सुबह दस्त , बदबूदार और सफेद दस्त , मिचली , नींदमें दाँत किमिड़ाना , अस्थिरता , काँखना इत्यादि ।
  • साइलीसिया ३० या 200 ( 2 बुंद दिन में 3 बार ) – कब्जियत , थोड़ासा दस्त होकर उसका फिर भीतर चला जाना , पेट सख्त , फूला और गरम ।
  • मेग्नेशिया कार्ब 6 या 30 – बारंबार खट्टी के , मल में खट्टी गन्ध इत्यादि ।
  • एपिस 30 या 200 – नींद से चौंक पड़ना , थोड़ा पेशाब , पीले रंग के पतले दस्त इत्यादि ।
  • जेल्सीमियम 30 या 200 – अनिद्रा , अस्थिरता , करवट बदलते रहना , चिल्लाकर रोना इत्यादि ।
  • पल्सेटिला 30 या 200 ( 4 बुंद दिन में 3 बार ) – आँव मिला दस्त , शामके समय दस्तों का बढ़ना , भूक न लगना , बदहजमी इत्यादि ।

दाँत निकलने में देरी होनेपर –

कल्केरिया कार्ब , साइलीसिया , सल्फर ।

दाँत निकलने के समय कब्जियत –

ब्रायोनिया , क्वोमिका और ओपियम ।

दाँत निकलने के समय पतले दस्त –

कैमोमिला , इपीकाक , मर्क्युरियस सल , पल्सेटिला , पोडोफिलम , सल्फर इत्यादि ।

दाँत निकलने के समय अस्थिरता और अनिद्रा –

एकोनाइट , बेलेडोना , केमोमिला , कोफिया इत्यादि ।

आवश्यक सूचना –

मसूढ़े फूले हुए हों , दाँत झलक रहे हों लेकिन फिर भी बाहर न निकलते हों तो तेज चाकूसे मसूढ़े को जरा चीर देना चाहिये । इससे दाँत आसानी से बाहर निकल आते हैं । बुखार आनेपर बार्ली और पतले दस्त आनेपर बार्ली या पानी मिला दूध देना चाहिये ।

इसे पढ़ें – बच्चों द्वारा बिस्तर पर पेशाब करने की होम्योपैथिक दवा । Homeopathic medicine for Bedwetting

Leave a Reply

Your email address will not be published.