बच्चे का बहुत रोने का कारण, लक्षण और होम्योपैथिक उपचार । Treatment of Crying of Infants

रोना छोटे बच्चों की भाषा है । वे अपनी सभी आवश्यकताएँ रोकर ही प्रकट करते हैं । भूख लगनेपर , दूध पीनेके लिए , एक ही करवट बहुत देरतक लेटनेपर करवट बदलनेके लिये या ऐसी ही कोई भी शिकायत होनेपर वे रोया करते हैं । इसलिये जब वे रोयें , पहले उनकी साधारण आवश्यकताओं पर ध्यान देना चाहिये । यदि वे बहुत रोयें और कोई कारण स्पष्ट न दिखायी दे तो समझना चाहिये कि उनके शरीर में कहीं दर्द आदि हो रहा है । अनेक बार चिऊँटी आदि के काटने पर भी बच्चे से उठते हैं , इसलिये उनका कपड़ा निकाल इसकी भी जाँच कर लेनी चाहिये ।

बच्चों को चुप रखने के लिये अनेक माताएँ या दाइयाँ उन्हें अफीम खिलाकर सुला देती हैं । यह बहुत ही बुरा है । इससे उनका स्वास्थ्य सदा के लिये नष्ट हो जाता है । यदि बच्चे बिना किसी कारण के बहुत समय तक रोते रहें तो निम्न लिखित दवाएँ व्यवहार करनी चाहिये ।

बच्चों के बहुत रोने का होम्योपैथिक दवा । Homeopathic medicine for Crying of Infants

  • बेलेडोना 6 , 30 या 200 ( 4 बुंद दिन 3 बार ) – इस दवासे अनेक बार बहुत लाभ होता है । यदि बच्चे चौंक कर नींद से उठ बैठें और जोर से रोने लगें तो उस अवस्था में भी यही दवा देनी चाहिये ।
  • एकोनाइट या कोफिया 6 या 30 ( 4 बुंद दिन 3 बार ) – बेलेडोना से लाभ न होने पर इसे देना चाहिये , खासकर जब रोने के साथ बेचैनी और बुखार भी मौजूद हो ।
  • केमोमिला 6 या 30 – यदि कान में या शिर में दर्द होने के कारण बच्चा रोता हुआ मालूम हो तो इसे देना चाहिये ।
  • एन्टिमः क्रूड 6 या 30 – शरीर में हाथ लगाने या बहलाने से बच्चेका रोना , चिड़चिड़ा स्वभाव इत्यादि ।
  • कोलोसिन्थ 6 ( 4 बुंद दिन 3 से 4 बार ) – पेट में दर्द के कारण बच्चे का रोना , पैर मोड़कर पेटपर रखना , पेट दबाने से चुप रहना इत्यादि ।
  • सीना 30 या 200 ( 2 बुंद दिन 3 से 4 बार ) – पेटमें कृमि – दोष , हाथ लगाने से डरकर रोना , अस्थिरता , सबको मारने दौड़ना इत्यादि ।

आवश्यक सूचना – अनेक बार बच्चों को नहला देनेसे उनका रोना बन्द हो जाता है ।

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