सरदी लगना , दूषित दूध पीना , अधिक दूध पीना या किसी तरह की दुष्पाच्य चीजें खाना आदि कारणों से बच्चों को यह रोग होता है । अनेक बार माता के खान – पान के दोष से भी बच्चे को यह रोग हो जाता है ।

बच्चों के पेट में दर्द होने कारण क्या है । ETIOLOGY OF COLIC OF INFANT
यह रोग होने पर बहुत रोना , छटपटाना , रोते रोते चेहरे का लाल हो जाना , अस्थिरता , शरीर का काँपना , पेट का फूलना , पेट में गड़गड़ाहट इत्यादि लक्षण प्रकट होते हैं । कभी कभी इस रोगके साथ दस्त भी आने लगते हैं ।
बच्चों के पेट दर्द का होम्योपैथिक दवा । HOMEOPATHIC MEDICINE FOR COLIC OF INFANT
- केमोमिला 30 या 200 ( 2 ,3 बुंद दिन में 3 बार ) – पेट का फूलना , दर्द के कारण रोना चिल्लाना , पैर मोड़कर पेट पर रखना , पैर ठण्ढे हो जाना इत्यादि ।
- कोलोसिन्थ 30 या 200 – केमोमिला से लाभ न होने पर इसे देना चाहिये ।
- इपीकाक ६ , ३० या 200 ( 2 बुंद 2 बार ) – दर्द के कारण रोना , मिचली या कै , हरे रंग के फेना जैसे बदबूदार दस्त ।
- चायना 30 या 200 (2 बुंद 3 बार) – तलपेट फूला और कड़ा , प्रायः शाम के समय यह रोग होना , बच्चे का कभी हँसना और कभी रोना इत्यादि ।
- नक्सवोमिका ३० या 200 ( 4 बुंद 3 बार ) – कब्जियत के साथ पेट मे शूल हो तो इसे देना चाहिये ।
- प्लसटीला 30 या 200 ( 2 बुंद 3 से 4 बार ) – पेट में वायुसञ्चय , पेट का टटाना , शाम के समय दर्द का बढ़ना , जाड़ा मालूम होना , चेहरा फीका इत्यादि । इनके अतिरिक्त एकोनाइट , बेलेडोना , मेग्नेशिया फस , ओपियम , साइना और स्टेनम आदि दवाओं से भी लाभ होता है ।
इसे देखें – बच्चों के दाँत निकलने का होम्योपैथिक उपचार Homeopathic treatment of Dentition