रक्तस्राव का होम्योपैथी इलाज

  1. मिलीफोलियम Q : बिना दर्द का , शुद्ध लाल रक्त , किसी भी यंत्र से हो , यह दवा तुरन्त फायदा करती है ।
  2. बेलाडोना 30 : रक्त पतला , लाल गरम , साथ ही जमे हुए खून के टुकड़े , प्रसव के बाद ज्यादा रक्त स्राव ।
  3. कार्बोवेज 30 : शरीर के किसी भी भाग से बहुत दिनों से रक्त स्राव होता हो , रोगी कमजोर , हाथ – पैर ठंडे , पंखा कराने के लिये चिल्लाना ।
  4. आर्निका 30 : खांसते – खांसते मुँह व आंख से खून निकले ।
  5. हेमामेलिस Q , 30 : मलद्वार में तकलीफ , दर्द , जलन , अकड़न , बवासीर में खून निकले । ( बद रंग भी )
  6. सिनामोनम : गिरने , चोट लगने , कांखने से , केन्सर से , जरायु से रक्तस्राव रोकने की उत्तम दवा ।
  7. ट्रिलीयम पेण्डुलम 30 : प्रसव के बाद ज्यादा रक्तस्राव , मासिक स्राव ज्यादा देर तक , स्राव गरम किसी प्राकर से रुकता नहीं ।
  8. फेरम मेट 30 : चमकीला , लाल , पतला , काला , रक्तस्राव , जमे हुए खून के टुकड़े , कमजोर , चेहरा फीका ।
  9. ब्रायोनिया 30 : मासिक स्राव के बदले नाक से रक्तस्राव ।
  10. नेट्रम नाइट्रिकम 30 : पेशाब के रास्ते से , नाक से , चेचक की गोठियों से रक्तस्राव ।
  11. लैकेलिस 30 : बैंगनी नीला रक्तस्राव पतला किसी भी स्थान से , नींद में या नींद के बाद वृद्धि , अधिक मात्रा में ज्यादा दिन तक ।
  12. क्रोटलस 30 : किसी भी स्थान से काला रक्त रोग की गंभीर हालात , सभी मार्गों से नाक , कान , मुँह , जरायू या रोम – रोम से भी हो ।
  13. हायोस्यामस 30 : शरीर में फड़कन , होश – हवास खोया सा , शंकालू , निर्लज्ज रोगी का रक्तस्राव ।
  14. इपिकाक 30 : चमकीला लाल रक्तस्राव , किसी भी यंत्र से हो , जी मचलता हो , ( चोट लगने से न हो )
  15. एकोनाइट 30 : चमकीला लाल रक्तस्राव , साथ ही घबराहट , बेचैनी , भय , मृत्यु भय , प्यास ।
  16. केक्टस Q : हृदय रोग , प्रसव जैसी वेदना , जरायु से थक्का थक्का रक्त निकलने में परेशानी , पेशाब का वेग , पर निकलता कम , मूत्रनली से थक्का थक्का खून निकले ।
  17. सीकेल कोर 30 : काला पतला सा लगातार , बहुत दिनतक जारी रहने वाला जरायु का स्राव दुबली पतली रोगिणी । शरीर ठंडा , खुली हवा अच्छा लगना ।

रक्तस्त्राव रोकने के लिये कुछ रामबाण भारतीय होमियोपैथी औषधियाँ

  1. Cynodom Dactylon Q , 3,30 ( दूर्वा दूभि ) : घाव से या कटे हुए स्थान से रक्तस्राव , खूनी बवासीर से , यक्षमा का रक्तस्राव या नाक से रक्तस्राव ।
  2. Blumea odorata ( कुकुरम्भा , कुकुरोंदा ) : यह खूनी बवासीर की अच्छी दवा है , रक्त हल्का कालापन लिये होगा ।
  3. Ficus IndicaQ ( वट वृक्ष ) : रक्तस्राव रोकने की बहुत अच्छी दवा है । रक्त स्राव कहीं से भी चाहे क्षय रोग में , नाक से , मुँह से , बवासीर से , रक्तामाशय से , रक्त प्रदर या अत्यधिक मासिक स्राव , खून का पेशाब , लगातार चमकीला लाल रक्तस्राव , दवा रामबाण समझें । बेल , मिलीफोलियम फासफोस के समान है ।
  4. Acalypha Indica ( अस्तिमंजरी , मुक्त वर्षी अथवा खेकाली ) : अस्थमा रोग से होने वाला रक्तस्राव । सुबह बीमारी बढ़ना , मुँह से चमकीला लाल रक्तस्राव , शाम को थक्का – थक्का कालापन लिये । रात में खांसी ज्यादा , खांसते रक्त थूकना ।
  5. Menispernum , Q3x , 6x ( रक्तकंथालि ) : ऋतुस्राव के समय या दूसरे समय अधिक मात्रा में रक्तस्राव । रक्त कभी चमकीला थक्का – थक्का जमा हुआ । हमेशा थोड़ा – थोड़ा निकलना । चलने – फिरने में रक्त प्रवाह तेज हो जाता है , रक्तस्राव के कारण कमजोरी । इस दवा के प्रयोग से रक्तस्राव बन्द होकर रोगिणी तन्दुरुस्त हो जाती है ।

दवाओं का सामान्य सेवन – विधि 1. Q (मूली) 5 से 10 बूंद।  कुछ दवाओं में 2 बूंदें होंगी, जिसका उल्लेख इन-प्लेस पर है। 

2. 3x, 6 तीन बार या दिन में चार बार।

  3. 24 घंटों में 30 पोटेंसी की 1 बूंद की खुराक।  यह विशेष परिस्थितियों में तीन, चार बार भी उपयोग किया जाता है।

  4. सप्ताह में एक बार 200 पोटेंसी की एक बूंद। 

5. 15 दिन या महीने में एक बार 1 एम (हजार) की एक बूंद। 

6. 10 M शक्ति 1 खुराक 1 महीने या 2 महीने में। 

7. 50 हजार, सीएम एक लाख बिजली 1 महीने में एक बार 3 या 6 महीने में 1 बार गिरा।

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