सुर्य किरण चिकित्सा

आयुर्वेदिक विशाल, गहन और बहु आयामी शास्त्र है जो सिर्फ चिकित्सा का बात नहीं करता बल्कि चिकित्सा से ज्यादा महत्व पथ्य-अपथ्य के पालन और प्राकृतिक जीवन जीने को देता है। इस दृष्टि से प्राकृतिक चिकित्सा आयुर्वेद का ही एक अंग नजर आती है सूर्य किरण चिकित्सा के अंतर्गत की जाने वाली रंग चिकित्सा के तीन प्रमुख रंग हरा, नारंगी या लाल और नीला का स्थान वैसा ही है जैसे आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ का है। जैसे शरीर में हरे, नारंगी या लाल और नीले रंग के असंतुलन से रोग उत्पन्न होते हैं और रंग चिकित्सा द्वारा यह असंतुलित स्थिति दूर करने पर रोग दूर हो जाते हैं वैसे ही वात, पित और कफ का संतुलन बिगड़ने से उत्पन्न हुए रोग, त्रिदोषों (वात पित्त कफ )को संतुलीत करने से दूर हो जाते हैं। दोनों मामले प्राकृतिक स्तर के हैं और प्राकृतिक ढंग से, शरीर में पैदा हुई अप्रकृतिक स्थिति को दूर कर पुनः स्वस्थ करने वाले हैं।

वात के प्रकोप और रक्त विकार को दूर करने के लिए हरे रंग का उपयोग लाभकारी होता है पीत यानी गर्मी की अधिकता को दूर करने के लिए नीले रंग का और कफ यानी सर्दी की अधिकता को दूर करने के लिए नारंगी, पीला या लाल रंग का उपयोग लाभकारी होता है। इस तरह यह सिद्ध हो जाता है कि प्राकृतिक सूर्य किरण चिकित्सा और आयुर्वेदिक पद्धति से की गई चिकित्सा एक दूसरे के सहयोगी और पुरक पद्धतियां है और चुकी दोनों पद्धतियां प्रकृति के अनुकूल है इसलिए निरापद है यानी साइड इफेक्ट, रिएक्शन या आफ्टर इफैक्ट्स जैसे उपद्रव पैदा नहीं करती हैं। यह निष्कर्ष यह प्रेरणा और मार्गदर्शन देता है कि रोग को दूर करने के लिए हमें ऐसी निरापद और गुणकारी चिकित्सा पद्धति का ही उपयोग करना चाहिए।

रंगों में पाए जाने वाले तत्व

सूर्य किरण चिकित्सा में सूर्य की किरणों और रंगों का उपयोग होता है विभिन्न रंग विभिन्न प्रभाव रखते हैं और सूर्य किरण द्वारा यह प्रभाव शरीर को प्रभावित करता है इसके प्रभाव से शरीर के रोग दूर होते हैं तथा सुर्य रशिम के दैनिक प्रयोग से मनुष्य कफ, पीत और वात से उत्पन्न होने वाले सभी रोगों से मुक्त होकर 100 वर्ष पर्यंत जीवन जी सकता है प्राचीन काल से भारत में सूर्य की उपासना करने की जो परंपरा चली आ रही है उसका सीधा संबंध स्वास्थ्य और व्याधि से है जैसे कि वेदों में कहा गया है :- अनुसुर्य मुद यतां हृदघोत़ हरिमाचते रोगी हितस्य वरोनी तेनत्वा परिदध्मसि ।। अर्थात हिर्दय रोग सूर्य किरणों के साथ संपर्क करने से दूर हो जाएगा। वेदों में अनेक बार सूर्य किरणों से चिकित्सा करने और स्वास्थ्य रक्षा करने का उल्लेख किया गया है रंगों में जो तत्व होते हैं वे शरीर पर किरणों केे माध्य से प्रभाव डालते हैं यहां तीन प्रमुख रंगों में पाए जाने वाले तत्वों के बारे में जानकारी दी जा रही है जो सूर्य किरणों के माध्यम से शरीर को उपलब्ध हो सकते हैं ।

नारंगी रंग :- इस रंग में अल्कलीन, बेरियम ,लोहा, तांबा, आर्सेनिक, कैल्शियम ,हाइड्रोजन, कार्बन, एलुमिनियम और मैग्नीज पाया जाता है।

हरा रंग:- इस रंग में बेरियम, कार्बन ,क्लोरोफिल, क्लोरीन, तांबा, नाइट्रोजन, निकेल, प्लेटिनम ,सोडियम, रेडियम, हाइड्रोक्लोरिक एसिड और फेरम सल्फेट पाए जाते हैं।

नीला रंग:- इसमें अल्युमिनियम, बेरियम, क्लोरोफॉर्म, कैडमियम, तांबा, सीसा, निकेल, ऑक्सीजन, फास्फोरिक एसिड, जस्ता और टीन पाए जाते हैं।

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