हमारे शरीर की ग्रंथियां (Glands)

हमारे शरीर की ग्रन्थियां ( Glands ) संसार में हर चीज़ का अच्छा प्रयोग भी हो सकता है जिसे सदुपयोग कहते हैं और बुरा प्रयोग भी हो सक है जिसे दुरुपयोग कहते हैं । कोई भी चीज अपने आप में न तो अच्छी होती है और न बुरी , उसका जैसा उपयोग किया जाता है वह चीज वैसी ही सिद्ध होती है । जैसे ग्रन्थि को ही ले लें । अगर मन में कोई ग्रन्थि बुरी भावना से पैदा की जाए तो यह ग्रन्थि बुरी हो गई जैसे शत्रुता की भावना या हीनभावना वाली ग्रन्थि । यदि यह ग्रन्थि सद्भावना से पैदा की जाए तो यह अच्छी हो गई जैसे स्नेह भाव की ग्रन्थि , मधुर सम्बन्धों की ग्रन्थि । ऐसी ही ग्रन्थि , मन की तरह तन में भी पैदा हो जाती है जो अच्छी ( बनाइन ) भी होती है और बुरी ( मलिगनेण्ट ) भी हमारे शरीर में कुछ ग्रन्थियां प्राकृतिक रूप से ही होती हैं जो यदि अच्छी व स्वाभाविक स्थिति में हो तो शरीर और स्वास्थ्य के लिए हितकारी होती हैं और बुरी स्थिति में यानी विकृत हों तो अहितकारी सिद्ध होती हैं । इन में प्रमुख ग्रन्थियां आठ हैं यथा ( 1 ) पिनियल ग्रन्थि ( Pineal gland ) ( 2 ) पीयूष ग्रन्थि ( Pituitary gland ) ( 3 ) थायराइड ग्रन्थि ( Thyrold gland ) , ( 4 ) पैराथायराइड ग्रन्थि ( Parathyrold gland ) ( 5 ) थायमस ग्रन्थि ( Thymus gland ) ( 6 ) अधिवृक्क ग्रन्थि ( Adrenal gland ) ( 7 ) अग्न्याशय ग्रन्थि ( Pancreas gland ) ( 8 ) प्रजनन ग्रन्थि ( Gonad gland ) । इनका संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत है ।

  1. पिनियल ग्रन्थि – यह ग्रन्थि मस्तिष्क के पीछे मध्य भाग में स्थित होती है जो राई से भी छोटी होती है । यह सूझबूझ , तत्काल निर्णय एवं सतर्कता और शरीर का पूरा प्रबन्ध करने का कार्य करती है । इसे तीसरी आंख भी कहते हैं ।
  2. पीयूष ग्रन्थि –यह ग्रन्थि मस्तिष्क के नीचे मध्य भाग में मटर के दाने के बराबर होती है । यह ग्रन्थि अन्य सभी ग्रन्थियों पर प्रभाव और नियन्त्रण रखती है अतः इस ग्रन्थि की संचालिका अथवा मास्टर ग्लेण्ड कहते हैं।
  3. थायराइड ग्रन्थि – यह ग्रन्थि कण्ठ के नीचे गले की जड़ में और दो पिण्डों में बनी हुई होती है । इसका सम्बन्ध पाचन संस्थान और प्रजनन अंगों से रहता है और यह ग्रन्थि शरीर के अनेक कार्यकलाप एवं गतिविधियों का नियन्त्रण करती है ।
  4. पेराथायराइड — यह ग्रन्थि गले में , थायराइड ग्रन्थि के पीछे , दोनों तरफ 2-2 छोटी ग्रन्थियां यानी चार ग्रन्थियां होती हैं । यह शरीर में रक्त के रासायनिक एवं पोषक तत्वों को सन्तुलित रखने में सहायता करती है ।
  5. थायमस ग्रन्थि – यह दोनों फेफड़ों के बीच , हृदय से थोड़ा ऊपर और गर्दन के नीचे होती है । शिशु के शरीर और स्वास्थ्य की रक्षा और पोषण करना इस ग्रन्थि का प्रमुख कार्य है । यह रोगों से बच्चों के शरीर व स्वास्थ्य की रक्षा करती है और जैसे जैसे आयु बढ़ती है वैसे यह काम करना बन्द करती जाती है और अन्त में लुप्त हो जाती है ।
  6. अधिवृक्क ग्रन्थि – यह ग्रन्थि जोड़े से गुर्दे के ऊपरी भाग में होती है और अनावश्यक और विजातीय द्रव्यों को शरीर से बाहर निकालती है ।
  7. अग्न्याशय ग्रन्थि – यह लिवर के पास स्थित रहती है और पाचन – क्रिया में सहयोग करने के अलावा इन्सुलिन भी बनाती है जो रक्त में शर्करा की मात्रा को सन्तुलित रखता है ।
  8. प्रजनन ग्रन्थि- यह ग्रन्थि पुरुषों के अण्डकोश में और महिलाओं के डिम्बाशय में होती है और प्रजनन कार्यों को सम्पादित करने में सहयोगी होती है ।

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