सोयाबीन के फायदे । और सोयाबीन के कुछ व्यंजन एवं उन्हें बनाने की बिधी।

सोयाबीन से सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ एवं व्यंजन बनाये जा सकते हैं जो अपेक्षाकृत सस्ते भी पड़ते हैं और पौष्टिक व शक्तिवर्द्धक भी होते हैं । गरीब वर्ग के लिए तो सोयाबीन प्रकृति का वरदान ही है मुझे आश्यर्च है कि भारतवासी इतने अच्छे खाद्य पदार्थ से अपरिचित और वंचित बने हुए हैं ।

सोयाबीन को प्रोटीन का राजा क्यों कहा जाता है ।

1 सोयाबीन में प्रोटीन इतनी ज्यादा मात्रा में होता है कि इसे ‘ प्रोटीन का राजा ‘ कहा जाता है । प्रोटीन शरीर की वृद्धि , विकास और सुडौलता के लिए कितना जरूरी होता है यह सभी बुद्धिमान जानते हैं महिलाओं के लिए सोयाबीन विशेष रूप से लाभप्रद और उपयोगी है । गर्भवती और नव प्रसूता स्त्री को सोयाबीन से बने व्यंजन , सोयाबीन से बना दूध , दही आदि का सेवन कराना चाहिए । सोयाबीन का आटा , दूध , दही आदि के सेवन से गर्भवती का शरीर पुष्ट और बलवान तो बनता ही है साथ ही गर्भस्थ शिशुको भी पुष्टि प्राप्त होती है । जिन गर्भवती महिलाओं का शरीर और स्वास्थ्य जोर हो उन्हें पूरे गर्भकाल में सोयाबीन आटे की रोटी , सोयाबीन से बना दूध , दही तथा अन्य व्यंजनों का उचित मात्रा में सेवन करना चाहिए । इससे उनके शरीर की कमजोरी दूर होगी , शरीर शक्तिशाली होगा और गर्भस्थ शिशु का भी शरीर मज़बूत होगा और वे एक स्वस्थ , सुडौल तथा निरोग शिशु को जन्म दे सकेंगी ।

सोयाबीन का आटा बनाने की बिधि एवं उसके फायदे ।

सोयाबीन का आटा बनाने के लिए इसे शाम को पानी में 12 घण्टे तक डाल कर रखें । सुबह धूप में अच्छी तरह सुखा कर चक्की में पिसवा लें । चाहें तो इस आटे को गेहूं के आटे में मिला लें या सिर्फ़ सोयाबीन के आटे की हीरोटी बनाएं – खाएं तो बहुत पौष्टिक आहार होगा । एक बात का खयाल रखें कि सोयाबीन का आटा अधिक दिनों तक रखने पर खराब हो जाता है इसलिए कम समय के योग्य मात्रा में ही आटा तैयार करें । नये सोयाबीन का आटा अधिक स्वादिष्ट होता है । इसका स्वाद बादाम जैसा मधुर और रंग भी बादामी पीला होता है । इसके समान पौष्टिक कोई दूसरा अन्न नहीं । मांसाहारी मांस की पौष्टिकता की बड़ी तारीफ करते हैं पर पोषक – आहार विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से सिद्ध होता है कि एककिलोसोयाबीन आटाढाई किलो मांस के बराबर पुष्टिदायक होता है और कमाल की बात यह है कि इसमें वे दोष नहीं होते जो मांसाहार में होते हैं । आजादी के 50 वर्ष बीत जाने पर भी , हमारा देश कई मामलों में आज भी पिछड़ा हुआ है । यही हाल सोयाबीन के मामले में भी है कि जहां विश्व के अनेक देशों में सोयाबीन का भरपूर उपयोग किया जा रहा है वहां हमारे देश में अधिकांश लोग इसे जानते तक नहीं । विदेशों में लोग मांसाहार छोड़ कर शाकाहारी हो रहे हैं और सोयाबीन के केक , बिस्कुट , ब्रेड आदि खा रहे हैं । हमारे देश के गरीब लोग पोषक आहार तो क्या , दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं । यदि वे सोयाबीन का सेवन करने लगें तो सस्ते दामों में पौष्टिक आहार प्राप्त कर लेंगे ।

सोयाबीन का तेल के फायदे ।

सोयाबीन का तेल भी बनता है और छोटे बड़े पेकिंग में बाजार में मिलता भी है । यह तैल स्वादिष्ट भी होता है और अन्य सभी खाद्य- -तैलों से ज्यादा पौष्टिक भी होता है । इसका तैल मख्खन के गुणों की पूर्ति करता है । अन्य तैलों के मुकाबले सस्ता होते हुए भी , सोयाबीन तैल ज्यादा पौष्टिक होता है इसलिए रसोई में सोयाबीन का ही तैल उपयोग में लेना चाहिए ।

सोया ट्रान कैसे बनायें। और सोया ट्रान के फायदे ।

भुने चने , गेहूं , मक्का आदि के समान सोया ट्रान भी बनाया जा सकता है । यह बहुत स्वादिष्ट होता है । ट्रान बनाने के लिएसोयाबीन के बीजों को नमक युक्त पानी में डाल कर 12 घण्टे तक रखें । इससे ये बीज फूल जाएंगे । इन्हें 10 मिनिट तक पानी में उबाल कर निकाल लें और धूप में खूब अच्छी तरह सुखा कर भुनवा लें । इसे नाश्ते के तौर पर खाइए , पिकनिक में खाइए या जेब में रख कर चलते फिरते , काम काज करते हुए 2-2 दाने मुंह में डाल कर चबाते रहिए । इससे भूख भी शान्त होगी और शरीर में ताज़गी व फुर्ती भी आएगी । किराने की दुकान वाले , फेरी लगाने या ठेला लगाने वाले इस ट्रानः 50 व 100 ग्राम के पोलिथिर्ज पेकिंग में बेच अच्छी कमाई कर सकते हैं ।

सोया – फ्राय बनाने की बिधि एवं उसके फायदे ।

पानी में नमक व खाने सोडा डाल कर इसमें सोयाबीन डाल कर । 2 घंटे तक रखें । फिर निकाल कर तैल में कुरकुरे होने तल लें । हलका मसाला मिला लें ये सोयीय बहुत स्वादिष्ट और मजेदार गते हैं । और प्राकृतिक खान – पान के में इनका से करें ।यह स्वादिष्ट ही नहीं , सस्ते भी हैं इसलिए महंगा नमकीन न खा कर सस्ता और स्वादिष्ट सोया फ्राय खुद भी खाइए और मेहमानों को भी खिलाइए । मेहमान भी चकित हो कर पूछेगे कि वाह , आखिर यह है क्या चीज़ ? सोया फ्राय भी ऐसी आइटम है कि इसे पोलिथिन पेकिंग में पेक करके फेरी वाले , ठेले वाले या दुकान वाले बेच सकते हैं । फास्ट फुड से तो यह गुणवत्ता के मामले में लाख वर्जे बेहतर है और बहुत सस्ता भी । एक बार लोगों को इसका स्वाद लगा कि मांग और बिक्री बढ़ती चली जाएगी । माताएं लाइ प्यार के कारण छोटे बच्चों को टाफी चाकलेट खिलाती हैं जो बच्चों को नुकसान करती है । उन्हें घर में सोयाबीन के बने सोया ट्रान या सोया फ्राय बना कर रखना चाहिए और बच्चों को टाफीचाकलेट की जगह इन्हें खाने को देना चाहिए । इससे एक तो महंगे टाफी व चाकलेट खरीदने से बचा जा सकेगा सो पैसे की बचत होगी , दूसरे , टाफी चाकलेट खाने से बच्चों के स्वास्थ्य को जो नुकसान पहुंचता है वह नुकसान नहीं होगा और तीसरे , सोयाबीन के पोषक तत्व प्राप्त होने से बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा और शरीर मजबूत रहेगा । कहिए , कैसी कही ? अब यह आपके हाथ में है कि आप हमारी बात मानें और अमल करना शुरू करें ।

सोया – बॉइल्ड बनाने की बिधि औऱ फायदे ।

शाम को सोयाबीन पानी में डाल कर 12 घण्टे के लिए रख दें । दूसरे दिन इन्हें , कुकर में बफा लें या तपेली में उबाल कर पानी से सोयाबीन निकाल लें । ठण्डा करके इस पर मसाले बुरकते हुए मिला लें , प्याज ( यदिखाते हों तो ) और हरा धनिया काट कर डाल दें , चाहें तो पालक , ककड़ी , टमाटर , गाजर जो भी उपलब्ध हो सो काट कर डाल दें , नींबू निचोड़ दें , इलायची पीस कर डाल दें या इसे मीठा करना हो तो मसाले न डाल कर गुड़ मसल कर डाल दें और खूब चबाचबा कर नाश्ते में खाएं । यह प्रयोग ज्यादा नहीं तो 40-45 दिन ही नियम से कर लें फिर देखें कि शरीर में कैसी चुस्ती , फुर्ती और ताकत आती है । कमजोर शरीर वाले युवक युवतियां प्रायः पूछा ही करते हैं , विशेष कर युवक ज्यादा पूछते हैं कि शरीर का दुबलापन कैसे दूर करें तो मैं ऐसे सभी युवक – युवतियों को यह नेक सलाह देता हूं कि वे डेढ़ – दो माह , धैर्यपूर्वक रोजाना सोया बाइल्ड को नाश्ते में खूब चबाचबा कर खाएं और देख लें कि उनका शरीर कैसा सुडौल और शक्तिशाली बनता है ।

सोयाबीन का शरीर और स्वास्थ्य पर प्रभाव ।

सोयाबीन का शरीर और स्वास्थ्य पर जितना अच्छा असर पड़ता है उतना अन्य किसी भी अनाज का नहीं पड़ता क्योंकि सोयाबीन ही एक मात्र ऐसा सौम्य पदार्थ है जिसमें प्रोटीन , वसा , कार्बोहाइड्रेट , खनिज , लवण , केलौरी आदि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं फिर भी सोयाबीन कब्ज नहीं करता बल्कि क़ब्ज़ निवारण करता है । सोयाबीन के सेवन में लाभ ही लाभ है । एक तो सस्ता , दूसरे पोषक तत्वों से भरपूर , और क्या चाहिए । इसके सेवन से खून में अम्लता नहीं बढ़ती बल्कि यह खून को क्षार प्रधान बनाते हुए विजातीय द्रव्यों को बाहर रखता है । इसकी यह विशेषता ही स्वास्थ्य की रक्षा करती है । इसके सेवन से कब्ज नहीं होता तो गैस भी पैदा नहीं होती । इसका प्रोटीन सहज सुपाच्य होने से यह बालक , वृद्ध , कमजोर , रुग्ण , गर्भवती और प्रसूता स्त्री सभी के लिए बहुत उपयोगी है । इसका दही उदर विकार नष्ट करने , पेट और आंतों को साफ रखने और पाचनशक्ति ठीक रखने के लिए बहुत ही उत्तम है । यह एक सस्ता टॉनिक है जो शरीर के अंग प्रत्यंग को स्वस्थ और सबल रखता है । इसका प्रभाव पूरे शरीर पर बहुत अच्छा पड़ता है । जिन बच्चों की बाढ़ नहीं होती , शरीर ठीक गया से विकसित नहीं होता , उनके लिए तो यह बहुत की कारगर टॉनिक है । इसके सेवन से बच्चों के शरीर में स्वस्थ कोष बनते हैं , दिमाग के ज्ञान – तन्तु बलवान होते हैं और उनकी देह सुन्दर सुडौल बनती है । यही एकमात्र ऐसा अनाज है कि जो बच्चों , खिलाड़ियों , दौड़ लगाने वालों , परिश्रम करने वाले मजदूरों , व्यापारियों और दिमागी काम करने वालों को ऊंची प्रोटीन और कैलोरी आदि पर्याप्त मात्रा में प्रदान कर स्वास्थ्य और शरीर को पुष्ट और बलवान बनाता है ।

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