सेंधा नमक व आयोडीन युक्त समुन्द्री नमक के कुछ अन्तर इन 2021

सेंधा नमक : यह प्रकृति का प्रसाद है , इस धरती पर पाये जाने वाले जितने भी प्रकार के नमक है उनमे सबसे ज्यादा उत्तम व शुद्ध नमक कोई है तो वो सिर्फ सेंधा नमक ही है । सेंधा नमक की उत्पत्ति का इतिहास करोड़ों वर्ष पुराना है | सेंधा नमक का महत्व सोने से भी ज्यादा माना गया है | इसका उपयोग ऋषि मुनि आयुर्वेद मे चिकित्सा के लिए करते आये हैं | आज भी यह उतना ही गुणकारी व पौष्टिक है । हर प्रकार से रसायन व प्रदूषण रहित है । हमारे शरीर के लिए ज़रूरी सभी 84 प्रकार के शुक्ष्म पोषक तत्व इसमे मौजूद है , जैसे कैल्शियम , आयरन , फोस्फोरस , कॉपर , जिंक , आयोडीन आदि | इसमें सोडियम की मात्रा कम होती है | इसकी पवित्रता व शुद्धता के कारण ही व्रत व उपवास मे यही नमक काम मे लिया जाता है । इससे भोजन श्रेष्ठ व पवित्र बनाता है ।

यह नमक कई रोगों से हमारा बचाव करता है जैसे कि अस्थमा , साइनस , थाइराइड , उच्च व निम्न रक्तचाप ( ब्लड प्रेशराबी ० पी ० ) , लकवा , मधुमेह , अपच , वायु रोग , कब्ज , मूत्र संबंधी रोग आदि | यह श्वास क्रिया को ठीक करता है , शरीर में हड्डियों व मांसपेशियों को ताकत देता है , शरीर के पी . एचा मान को नियंत्रित करता है , शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकाल देता है व इसके उपयोग से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है । शरीर में सेंधा नमक से जो – जो पौषकता मिलती है , इसी पौषकता की कमी होने से लकवा ( पैरालाईसिस ) होता है व इसी पौषकता की कमी होने से ब्रेनहेमरेज होता है । सब्जियों को बनाने से पहले यदि सेंधा नमक के घोल मे रखा जाए तो काफी हद तक कीट नाशक के जहर को कम करता है | इसके प्रयोग से सब्जी का स्वाद बढ़ जाता है | अगर अचार मे डाला जाए तो आचार ज्यादा दिनों तक खराब नहीं होता । सेंधा नमक के साबुत पत्थर को यदि ऑफिस , दुकान व कमरे आदि मे रखा जाए तो यह उस स्थान की नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकाल कर उस स्थान को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है व यदि इसे कम्प्यूटर या टीवी के सामने रख दें तो अल्ट्रा वोइलेट रेस को अपने मे खींच कर लेता है ।

समुद्री नमक : इस नमक मे 97.5 % सोडियम क्लोराइड है व बाकी 2.5 % मे , पोटेशियम आयोडाइड , सोडियम बाईकार्बोनेट , एल्युमिनियम सिलिकेट व सोडियम ग्लूटामेट ( sodium glutamate ) , इसमें डालियाँ न बने इसलिए इसमें कुछ Anti – caking agents ( potassium or sodium ferrocyanide ) आदि केमिकल्स है । इनमे सबसे ज्यादा खतरनाक पोटेशियम आयोडाइड ( potassium iodide ) व एल्युमिनियम सिलिकेट , यह दोनों ही केमिकल यदि शरीर मे जाए तो नपुंसकता लाते है | ये सब शरीर के लिए घातक विष है ।

एल्यूमीनियम हमारे मस्तिष्क और नाडीयों को क्षतिग्रस्त करता है और अलझाइमर जैसे रोग पैदा करता है । इसी कारण आयोडीन यक्त नमक दनिया के कई देशो मे प्रतिबंधित है । नमक की एक विशेषता होती है कि वह वातावरण की नमीं को अपने अंदर खींचता है , ऐसा न हो व नमक एक्स्ट्रा फ्री फ्लो हो इसके लिए इस नमक मे कई प्रकार के केमिकल्स ( magnesium carbonate , calcium silicate , sodium silico – aluminate and tricalcium phosphatel ) मिलाये जाते है व इसको सफ़ेद करने के लिए ब्लीचिंग एजेंट्स मिलाते है जो कि शरीर को नुकसान करते है । रिफाइंड नमक के प्रयोग से शरीर को किसी भी प्रकार के मिनरल्स नहीं मिलते है । इसके सेवन से उच्च रक्तचाप ( बी पी ) , किडनी फेल्युर , कोलेस्ट्रोल , ब्रेन हेमरेज़ व रक्त दोष , हृदय रोग , आंतों के रोग सिरदर्द आदि और भी कई रोग होने के संभावना होती है । भारत में ये घातक रोग केमिकल वाले नमक के उपयोग करने के बाद ही आए है । इस नमक को यदि दही मे डालकर खाते है तो कई बीमारिया होती है , कारण इससे दही में मौजूद सभी जीवाणु जो कि शरीर के लिए लाभकारी है समाप्त हो जाते है जबकि सेंधा नमक से दही में मौजूद जीवाणु समाप्त नहीं होते व दही शरीर को नुकसान करने के बजाए फायदा करता है ।

सेंधा नमक व आयोडीन युक्त समुन्द्री नमक के कुछ अन्तर :

सेंधा नमकआयोडीन युक्त समुन्द्री नमक
सेंधा नमक सफ़ेद सोना हैसमुद्री नमक सफ़ेद जहर है ।
इसमें 84 तरह के सूक्ष्म पोषक तत्व पाये जाते हैसिर्फ 3 मिनरल होते है
इसमें प्राकृतिक आयोडीन होता है जो कि आसानी से शरीर मे घुल जाता है ।इसमें केमिकल आयोडीन होता है , केमिकल आयोडिन शरीर मे घुलता नहीं है जिसके फलस्वरूप किडनी व गाल्ब्लेडर मे स्टोन बनने की पूरी संभावना रहती है ।
सेंधा नमक की खानें किसी भी प्रकार के प्रदूषण से मुक्त होती हैके प्रदूषित पानी को शुद्ध करने की प्रकृति द्वारा कोई व्यवस्था नहीं है | इसलिए इसको शुद्ध करने के लिये रसायनिक प्रक्रिया कि ज़रूरत होती है ।
इसके निर्माण में केमिकल्स का प्रयोग नहीं होता ।इसके निर्माण में केमिकल्स का प्रयोग नहीं होता ।
आयुर्वेद में वर्णन है व सबसे अच्छा माना जाता है व कई दवाओं में प्रयोग किया जाता है ।आयुर्वेद में सबसे खराब माना जाता है | यह केवल औद्योगिक उपयोग के लिए ठीक है ।
यह वात , पित्त व कफ आदि त्रिदोष के नियंत्रण में सहायक हैइससे वात , पित्त व कफ बिगड़ता है ।
इसको सीमित मात्रा में प्रयोग से किसी प्रकार कि बीमारी का ख़तरा नहीं रहता ।समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप , लकवा , हृदय घात आदि गंभीर बीमारियों का भय रहता है ।
100 % शाकाहारी हैसमुद्र में मछलियों समेत कई जीव जन्तु मरते रहते है जिनके अवशेष समुद्री किनारों पर देखे जा सकते है ।

हम लोग आयोडीन के पीछे भाग कर केमिकल वाला नमक खा रहे है , यह कोई समझदारी नहीं है | जितने आयोडीन की हमें ज़रूरत है वह तो हमें दालों , आलू , अरवी व हरी सब्जियों से भी मिल जाता है , हाँ जहाँ पहाड़ों मे आयोडीन कि कमी हो वहाँ यह ज़रूरी हो सकता है | 1930 से पहले समस्त भारत में सेंधा नमक ही काम में लिया जाता था , अंग्रेजों ने इसे बंद करा के समुद्री नमक का व्यापार शुरू किया | समुद्री नमक तो अपने आप में बहुत खतरनाक है लेकिन उमसे आयोडीन व अन्य केमिकल्स मिलाकर उसे और जहरीला बना दिया जाता है | आयोडीन युक्त समुद्री नमक कोई बहुत ज्यादा स्वास्थ्य के लिये लाभकारी नहीं होता , लेकिन इसका इतना ज्यादा प्रचार कर दिया गया है , कि हमें लगता है कि यह सेंधा नमक के मुकाबले बहुत अच्छा होता है । विश्व के लगभग 56 देशो ( अमेरिका , जर्मनी , फ्रांस , डेन्मार्क , स्वीडन आदि ) ने कई वर्षों पहले ही आयोडीन युक्त नमक को प्रतिबंधित कर दिया है ।

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