सामान्य – ज्वर ( General Fever ) का आयुर्वेदिक उपचार ।

सामान्य – ज्वर ( General Fever ) किसे कहते हैं ।

सर्दी , तेज धूप , वर्षा में भीगना , अधिक परिश्रम , चोट , रात्रि जागरण , जलवायु के परिवर्तन , अनियमित भोजन , उपवास , मादक वस्तुओं का सेवन आदि कारणों से शरीर में उष्णता की मात्रा बढ़ जाती है , जिसे सामान्य ज्वर ‘ कहते हैं ।

सामान्य – ज्वर ( General Fever ) का लक्षण क्या है ।

सामान्य – ज्वर में सिर – दर्द , सम्पूर्ण शरीर में दर्द , बेचैनी , प्यास पेशाब के रङ्ग में परिवर्तन आदि लक्षण प्रकट होते हैं । सामान्य ज्वर प्रायः 3 दिन में स्वयं ही ठीक हो जाता है । इसमें शरीर का तापमान 102 डिग्री के लगभग हो जाता है । सामान्य – ज्वर की चिकित्सा के लिए निम्नलिखित औषधियाँ हितकर है ।

सामान्य – ज्वर ( General Fever ) का आयुर्वेदिक चिकित्सा क्या है।

  1. ( पान का रस , अदरक का रस तया शहद – इन तीनों को 5-6 माशे की मात्रा में मिलाकर प्रातः – सायं पियें । इससे सामान्य – ज्वर शीघ्र दूर हो जायेगा ।
  2. तुलसी के पत्ता 20 नग , कालीमिर्च 20 नग , अदरक 6 माशा , दालचीनी 2 माशा- इन सब वस्तुओं को 1 पाव पानी में डालकर औटायें । फिर आग से नीचे उतार कर छान लें । उसमें 2.5 तोला मिश्री मिलाकर पीने से सामान्य – ज्वर ठीक हो जायेगा ।
  3. नीम की छाल 2 छटीक को कूटकर किसी मिट्टी के बर्तन में डालें , फिर उसमें 8 छटॉक पानी डालकर आग पर चढ़ा दें और खूब उबालें जब पानी दो छटॉक रह जाय , तब उसे उतार कर छान लें तथा उसमें शहद अथवा मिश्री डालकर गुनगुना ही पी जायें ।
  4. काढ़े को पीने बाद सम्पूर्ण शरीर को कपड़े से डालकर लेट जायें । थोड़ी ही देर में पसीना आकर ज्वर उतर जायगा । यदि आवश्यकता हो तो दूसरे दिन भी यही प्रयोग करें । यह उपाय कुनैन से भी अधिक लाभ करता है तथा हर प्रकार के ज्वर में उपयोगी है ।

सामान्य – ज्वर ( General Fever ) का यूनानी – चिकित्सा क्या है।

  1. हरी गिलोय 1 तोला वजनी टुकड़े को रात के समय पानी में भिगोकर रख दें । सुबह उसे मलकर तथा छानकर पी लें । इससे नया तथा पुराना दोनों तरह के बुखार दूर हो जाते हैं ।
  2. देशी अजवायन 1 तोला को सुबह मिट्टी के एक कोरे बर्तन में डेढ़पाव पानी भरकर भिगो दें । दूसरे दिन सुबह उस पानी को छानकर पी लें लगातार 7-8 दिन इसी प्रकार पीते रहने से नया तथा पुराना दोनों तरह के बुखार दूर हो जाते हैं ।
  3. फिटकरी के फूले का सफूफ बनाकर इसे 1 से 3 माशे तक की मात्रा में दिन में 2 या 3 बार शहद मिलाकर चाटने से मामूली बुखार ठीक हो जाता है।

सामान्य – ज्वर ( General Fever ) का होम्योपैथीक – चिकित्सा क्या है ।

  1. एकोनाइट 3x , 30 – ठण्ड या सूखी हवा लगने , धूप लगने , ओस में सोने आदि के कारणों से उत्पन्न ज्वर – जिसमें प्यास वेचनी , सिर – दर्द , अधिक हो , में इसे 2-2 घण्टे बाद दें । पसीना आ जाने पर औषच देना बन्द कर दें ।
  2. रसटाक्स 6 – बरसात की ठण्डी हवा लग जाने के कारण उत्पन्न ज्वर में विशेष हितकर है । इपिकाक -तीव्र के साथ जी मचलाना अथवा वमन होना आदि लक्षण हों और साथ खाँसी भी हो तो इसे दें ।
  3. पल्सटिला 6 – अधिक खाने – पीने या खान के बाद आने वाला ज्वर , जिसमें प्यास बिलकुल न हो- उसमें यह औषध लाभ करती है ।
  4. बेलाडोना 6 – ठण्ड लग जाने के कारण आने वाला ज्वर , जिसमें रोगी का मुँह तथा होंठ सूख गये हों , सिर में दर्द , प्यास आँखों में लाली तथा नसों का फड़फड़ाना आदि लक्षण अधिक हों । मोटे शरीर बालों के लिए यह विशेष हितकर है ।
  5. ब्रायोनिया 6- सूखी खाँसी , श्वास लेने में कष्ट , सिर , गर्दन , हाथ , पाँव तथा पीठ में दर्द , अधिक प्यास , हिलने डुलने से दर्द का बढ़ना , जीभ का मैली अथवा पीली हो जाना । मुँह का स्वाद बिगड़ जाना आदि लक्षणों में ।
  6. नक्सवोमिका 6 , 30- सर्दी के कारण होने वाला ज्वर , जिसमें नाक बन्द हो तथा कम की शिकायत हो ।

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