संतरा फल ही नही दवा भी है।

संतरा उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रकृति का उत्तम उपहार है । पेड़ पर ही पकने के कारण इसमें विटामिन ” सी ” और ” डी ” का अद्भुत सम्मिश्रण हो जाता है , जो रोगी की रोग निरोधक शक्ति को बढ़ाता है । जीवन – तत्वों की दृष्टि से यह बेमिसाल फल है । महात्मा गाँधी ने इसके गुणों पर रीझकर ही तो अपना मत इस तरह व्यक्त किया था- ” संतरों के सिवाय और कोई भी फल मेरे लिए आवश्यक नहीं है।”

इसमें विटामिन इ . बी . ई . भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहते हैं । थोड़ी मात्रा में पोटेशियम व मैग्नेशियम भी इसमें मिलते हैं । रक्त – शुद्धि के लिए ये परम गुणकारी हैं । जठराग्नि जगाने से भूख खुलकर लगती है तथा पाचन तंत्र भी संतुलित रहता है । इसमें ” ग्लूकोज ” तथा ” डैक्सट्रोज ” दो ऐसे तत्त्व होते हैं जो जीवनदायी तत्त्वों से परिपूरित हैं । पौष्टिकता की दृष्टि से यह दूध से भी अधिक महत्त्व का है । इसकी शर्कराओं में यह विशेष गुण है कि ये शरीर में प्रवेश करते ही रक्त में मिलकर शुद्धिकरण के कार्य में लग जाती हैं । इसके पाचन के लिए आमाशय को जरा भी अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ती है ।

संतरे का सेवन बहुत दुर्बल अवस्था में भी किया जा सकता है । इसके अतिरिक्त कोई अन्य फल नहीं जो इसके सदृश्य सरलता से पच जाता हो । इसका रस स्वास्थ्यप्रद और शक्तिदायक है । दौर्बल्यता का तो मानो , संतरा घातक शत्रु है । वैज्ञानिकों के विभिन्न प्रयोगों ने सिद्ध कर दिया है कि यदि संतरे का 50ग्राम रस , आधा किलो दूध के साथ मिलाकर बच्चों को दिया जाए , तो उनके वजन में वृद्धि होगी । आंतों की बीमारियां अजीर्ण आदि उनसे दूर ही रहेंगी । ” मानसिक तनावों , रक्तचाप वृद्धि , हृदय व मस्तिष्क की गर्मी के विकारों , अजीर्ण , कोष्ठबद्धता आदि में भी इसका रस परम गुणकारी सिद्ध हुआ है ।

रोग निवारक नुस्खे :- इन्फ्लुएंजा में यदि संभव हो तो संतरे का रस लगातार एक सप्ताह तक लेते रहें । संतरे को रेशों सहित खाना भी बड़ा गुणकारी साबित होता है । हर तरह के बुखार में रोगी के लिए संतरे का रस , पानी , दवा और भोजन का काम देता है । ये पेट की गर्मी को रोकता है । बुखार के विषैले मादे को रोकता है ।

मुँहासों में संतरे का रस विषयारामन करता है । संतरे के छिलके मुँह पर रगड़ने से चेहरा दमक उठता है । संतरों के छिलके सुखाकर पीस लें । थोड़े से चने के बेसन में मिलाकर उबटन बना कर चेहरे पर लगाकर सुखा लें । फिर ताजे पानी से धोकर चेहरा रगड़ लें । मुँहासे कुछ ही दिनों में करीब – करीब मिट जायेंगे ।

संतरे का रस गरम करके काला नमक और सौंठ का चूर्ण पीसकर मिला दें । पेट के रोगों में यह पेय रामबाण दवा है । फाँकों में यह द्रव्य रखकर भी चबा सकते हैं इस तरह संतरा केवल फल ही नहीं , रोग निवारक औषधि भी है ।

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