हिंदू धर्म में पूजा – कथा , आरती एवम् अन्य धार्मिक कार्य करते समय शंख बजाने के फायदे।

पूजा – कथा , आरती एवम् अन्य धार्मिक कार्य करते समय सनातनी ( हिन्दू ) लोग शंख फूंकते हैं , क्यों ?

शंख फूंकने के पीछे सनातन धर्म की पूर्ण रूप से धार्मिक आस्था निहित है । अथर्ववेद , 4/10/2 के अनुसार शंख की ध्वनि जहाँ तक पहुँचती है वहाँ तक के राक्षसों का नाश हो जाता है । युद्ध क्षेत्र में शंख फूंककर एक प्रकार से शत्रु को ललकारने के साथ उसके हृदय में भय उत्पन्न करने का कार्य करते हैं । महाभारत में कृष्ण जी की शंख ध्वनि सुनकर कौरवों के हृदय काँप उठते थे । पूजा में शंख ध्वनि का तात्पर्य यह है कि जिस देवी अथवा देवता की पूजा कर रहे हैं . शंख ध्वनि करके उनका जयकारा करते हैं ।

वैज्ञानिक कारण- शंख ध्वनि करने वाले व्यक्ति को दमा की बीमारी , श्वास रोग , फेंफड़ों का रोग , इन्फ्लूएंजा आदि नहीं होता । यदि कोई व्यक्ति बोलने में हकलाता है तो उसे बार – बार शंख फूंकने दिया जाए । हकलाना कम हो जाएगा ।

पूजा के पश्चात् प्रायः शंख का जल लोगों पर छिडकते हैं । क्यों ?

पूजा के समय शंख में जल भरकर देव स्थान में रखें । उसके बाद उसमें चन्दन का टीका लगाए । चन्दन का टीका लगाने से शंख में भरा जल चन्दन की सुगन्ध से परिपूर्ण हो जाता है । तत्पश्चात् पूजा की समस्त सामग्रियों पर वह सुवासित जल छिड़कें तथा पूजा में उपस्थित व्यक्तियों के ऊपर छिड़कें । शंख में रखे जल को मंत्रोच्चार करते हुए छिड़कना चाहिए । जिससे कि समस्त वस्तुएं पवित्र हो जायें । ऐसी मान्यता है ।

वैज्ञानिक कारण – शंख में कैल्सियम , फास्फोरस और गन्धक की मात्रा होती है । शंख में भरे जल को छिड़कने से वस्तुएँ रोगाणु रहित हो जाती हैं ।

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