मिर्गी ( Epilepsy ) का लक्षण एवं उसका इलाज

इसमें रोगी अचानक बेहोश हो जाता है । जहां और जैसी भी हालत में हो गिर पड़ता है । मुंह से झाग आने लगती है । हाथ – पैर अकड़ जाते हैं और जबड़ा भिंच जाता है ।

  • आत्म ग्लानि ( प्यार में धोखा ) , भय , शोक , आदि के कारण । :- इगनेशिया २०० या 1M , आवश्यकतानुसार
  • त्वचा रोग दब जाने के कारण । दौरे से पहले छाती व पेट में तनाव । दौरा पड़ने पर ज़बान कट जाती है । सिर एक तरफ को झुक जाता है , पेशाब निकल जाता है । :- कॉस्टिकम ३० , दिन में ३ बार
  • दौरा पड़ने पर ज़बान कट जाती है । सिर एक तरफ को झुक जाता है , पेशाब निकल जाता है । रोग की लहर घुटनों से या उंगलियों व अंगूठों से उठे और फिर पेट के निचले हिस्से तक जाए । रोगी अचानक दौरा पड़ने के कारण चीख़ के साथ गिर पड़ता है , और दौरे के बाद सो जाता है । :- क्यूप्रम मैट ३० , दिन में ३ बार
  • जब दौरे नींद के दौरान आएं । रोग की लहर नाभि के आस पास से शुरू हो । पूर्णिमा को या उसके आस पास दौरे आएं । :- साइलिशिया 1M , १५-२० दिन में एक बार
  • मोटे , थुलथुले लोगों में भय आदि के कारण दौरे जोकि पूर्णिमा के आस पास आएं । रोग की लहर नाभि के आस पास से ऊपर उठे और ऐंठन बढ़ती जाए । पानी पीने से रोग बढ़े । दौरे रात के समय ज़्यादा आएं । :- कैल्केरिया कार्ब IM , १५-२० दिन में एक बार
  • हस्तमैथुन या ज्यादा वीर्यास के कारण दौरे । रोग की लहर नाभि के आसपास से शुरू हो , रोगी बेहोश हो जाए । :- ब्यूफो राना २०० या 1M,१०-१५ दिन में एक बार
  • जब दौरा सुबह के समय हर २-३ सप्ताह बाद आए । :- सीपिया २०० या 1M , १०-१५ दिन में एक बार
  • बच्चों में जब किसी खास रोग के दब जाने से इस रोग की शुरूआत हो । उत्तेजना से रोग बढ़े । :- बैलाडोना ३० , दिन में 3 बार
  • जब दौरे अचानक और जल्दी – जल्दी आएं । किसी भी मामूली कारण ( भय , आतंक , हस्तमैथुन , आदि ) से दौरे पड़ने लगें । मिर्गी जिसमें कोई पूर्वाभास न हो । :- आर्टिमिसिया वल्गेरिस Q या ६ , दिन में ३ बार
  • जब शरीर अचानक अकड़ जाए और अंग फड़कने लगें और इसके बाद काफी कमज़ोरी आ जाए , जबड़े अकड़ जाएं । डरावनेपन के साथ चेहरा , हाथ – पैर या फिर पूरा शरीर विकृत हो जाए । रोगी अचेत हो जाए । ज़रा से छूने , आवाज़ , धमक या , गति से दौरे की पुनरावृत्ति हो । :- साइक्यूटा विरोसा ६ या ३० , दिन में ३ बार
  • चिड़चिड़े , तुनक मिज़ाज़ रोगी जो अक्सर कब्ज़ से पीड़ित हों । दौरा जिसमें रोगी सचेत रहे । :- नक्स वोमिका ३० , दिन में ३ बार
  • दौरा चेतना के साथ आए । तेज रोशनी से दौरे की पुनरावृत्ति हो । :- स्ट्रामोनियम २०० या 1M , आवश्यकतानुसार दौरा
  • आप Dr.Reckeweg R33 epilepsy drops भी प्रयोग करें क्योंकि यह बहुत लाभदायक दवा है।
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चेतावनी :

i ) दौरे के दौरान रोगी को मुँह के द्वारा कुछ भी खाने या पीने को न दें । दौरा पड़ते समय या दौरे के दौरान रोगी के मुँह में कोई चीज़ जैसे , चम्मच , आदि , न फंसाएं ।

ii ) रोगी को करवट के बल लिटाएं जिससे की जीभ अन्दर की ओर न गिरे । ऐसा करने से श्वासनली में ज्यादा लार भरने का ख़तरा भी कम रहेगा । जब तक रोगी को चेतना न आए उसके साथ रहें । आवश्यकता हो तो रोगी को तुरन्त अस्पताल – गाड़ी से अस्पताल पहुंचाएं ।

दवाओं की विस्तृत जानकारी के लिए मैटीरिया मैडिका देखें । रोग की पुनरावृत्ति में दवा दोहराई । जा सकती है ।

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