मंत्र भी ‘ वैध ‘ एवम् ‘ अवैध ‘ होते हैं । क्या आप जानते हैं ।

क्या मंत्र भी ‘ वैध ‘ एवम् ‘ अवैध ‘ होते हैं ?

जिस प्रकार की पति – पत्नी के समागम से उत्पन्न बालक को “ वैध ” तथा व्यभिचार द्वारा उत्पन्न बालक को समाज “ अवैध ” मानता है । जबकि उस बालक की उत्पत्ति स्त्री के ही गर्भ से होता है ठीक उसी प्रकार गुरु द्वारा प्रदान किया गया मंत्र “ वैध ” होता है तथा रटा – रटाया मंत्र अवैधता की श्रेणी में आता है । कुछ लोगों का कथन है कि गुरु द्वारा प्रदत्त ( दिया गया ) मंत्र एवम् पुस्तकों में लिखा मंत्र एक ही होता है ।

शब्द एवम् वर्णमाला एक ही होता है फिर यह भेद क्यों ?

यदि यह कहा जाये कि अग्नि तो एक ही है चाहे वह चिता शमशान की हो या हवन कुण्ड की . चूल्हे की हो अन्यत्र की । प्रकाश गुण जलाने की क्षमता एक समान होती है किन्तु यदि आसे कहा जाये कि श्मशान की जलती चिता पर खाना बनाकर खा सकते हो तो आपका सीधा जवाब ‘ नहीं ‘ में होगा । आप यह भी कह सकते हैं कि चिता की आग पर बनी रोटी भला खाने योग्य होगी । मंत्रों में भी ऐसा ही विचार होता है ।

महामृत्युंजय मंत्र एवं भवार्थ

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