बवासीर ( अर्श) का कारण , आयुर्वेदिक तथा घरेलु उपचार । ( Home and aayurvedic treatment of piles)

बवासीर होने का कारण क्या है? (Reasons of piles ) :-

यह रोग मुख्यतः कब्ज के कारण होता है । जिन लोगों को कब्ज की शिकायत लंबे समय तक रहती है उनको मुख्यतः यह रोग होता है । अत्यधिक बैठे रहने से भी यह रोग होता है ।

बवासीर कितने प्रकार के होते हैं । (Types of piles) :-

बवासीर दो तरह के होते हैं । 1 ) खुनी बवासीर 2 ) बादी बवासीर । इस रोग में मल बहुत कठिनाई से निकलता है और मल के साथ खून भी निकलता है । अत्यधिक तीखा , मसालेदार और चिकना भोजन करने से यहरोग बढ़ता है । इसलिए बवासीर वाले रोगी को खाने में हरी सब्जी और सलाद का प्रयोग अधिक करना चाहिये तथा तीखे मसाले और अत्यधिक खट्टी चीजों का उपयोग नहीं करना चाहिये ।

बवासीर का घरेलू उपचार (Home remedies for piles) :-कांच निकलना ( Prolapsus of Rectum )

  1. आँवले का चूर्ण एक तोला सुबह – शाम शहद के साथ लेने पर बवासीर में लाभ मिलता है ।
  2. एक चम्मच अनार के छिलकों का चूर्ण दिन में तीन बार ताजे पानी के साथ सेवन करें । इसके अलावा अनार के पेड़ की छाल का काढा बनाएं उसमें एक चम्मच सौंठ तथा मिश्री मिलाकर पीने पर बवासीर में लाभ होता है ।
  3. आँवले का चूर्ण दही के साथ खाने पर आराम मिलता है ।
  4. गवार की फल्ली के पत्ते तथा काली मिर्च के दाने बराबर मात्रा में मिलाकर दोनों को पीस लें तथा पानी में मिलाकर पिएं ।
  5. मूली का रस काला नमक डालकर पीने से भी आराम मिलता है ।
  6. 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण शहद के साथ चाटें । आराम मिलेगा ।
  7. एक चम्मच मैथी के बीजों को पीसकर 300 मीली . बकरी के दूध में औटायें । इसमें एक चम्मच पिसी हल्दी और एक चुटकी काला नमक भी मिला दे । और दूध ठंडा होने के बाद सेवन करें । बीमारी मे लाभ अवश्य मिलेगा ।
  8. प्रतिदिन सुबह खाली पेट तीन – चार पके हुये बीज वाले अमरूद खाने से बवासीर में काफी लाभ होता है ।
  9. गाजर और पालक का रस समान मात्रा में मिलाकर पीने से बवासीर खत्म होती जाती है ।
  10. छोटी पिपली का चूर्ण शहद केसाथ चाटनेपर बीमारी में आराम मिलता है ।
  11. बडी इलायची को जलाकर उसका चूर्ण बनाएं और प्रतिदिन सुबह दोपहर शाम ताजे पानी से लें ।
  12. काले तिल और ताजे मक्खन को समान मात्रा में मिलाकर खाने से बवासीर नष्ट होता है ।
  13. सुबह – शाम बकरी का दूध पीने से बवासीर में काफी लाभ होता है ।
  14. करेले का रस और मिश्री मिलाकर लेने से बवासीर में लाभ होता है ।
  15. प्याज के रस में घी और मिश्री मिलाकर खाने सेबवासीर में लाभ होता है ।
  16. हरड़ का पाउडर गुड़ के साथ मिलाकर खाने से बवासीर में लाभ मिलता है ।
  17. उबली हुई सब्जियाँ और सादा खाना इस बीमारी में लाभदायक है , इसके साथ सैंधा नमक मिलाकर मट्टे का सेवन अवश्य करें । और सलाद में मूली एवं गाजर काभी सेवन करें । अथवा चबा – चबाकर खाएं ।
  18. आंवले का चूर्ण एवं गुड़ मट्टे के साथ मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ मिलता है ।
  19. इमली के बीजों को भूनकर उनका छिलका हटा लें तथा उनका चूर्ण बनाकर प्रातःकाल दही के साथ सेवन करें ।
  20. एक चम्मच करेले के रस में थोड़ी मिश्री मिलाकर दिन में दो बार पीने से बवासीर में लाभ होता है ।
  21. काशीफल का रस सभी तहर के बवासीर में लाभदायक होता है ।

बवासीर पर लगाने के लिए लेप (मरहम)| (ointment of piles):-बवासीर ( Piles ) का होम्योपैथिक दवाएँ

  1. नीम और कनेर के पत्तों का लेप बवासीर के मस्सों पर लगायें ।
  2. तंबाकु के पत्तों की महीन चटनी बनाकर – मस्सों पर लेप करें ।
  3. नीम का तेल भी मस्सों पर लगाने से आराम मिलता है ।
  4. ताजे मक्खन में थोडी सी फिटकरी और पिसी हुई हरड़ मिलाकर मरसों पर लेप करने से आराम मिलता है ।
  5. हल्दी और कडवी तोरई को पीसकर उसका लेपमरसो पर लगाने से आराम मिलता है ।
  6. मरहम बवासीर : -वैसलीन सफेद 50 ग्राम , कपूर 6 ग्राम सल्फाडायजीन की ३ गोली , बोरिक एसिड 6 ग्राम । सबको बारीक करके वैसलीन में मिलाकर रात को सोते समय सुबह शौच जाने से पहले दिन में एक बार रोजाना उंगली के साथ अन्दर – बाहर मस्सों पर लगायें ।

बवासीर का आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic treatment of piles) :-भगंदर ( Fistula in Ano ) का होम्योपैथिक दवा

  1. कागजी नींबू काटकर 5 माशे देशी कत्था पीसकर नींबू के टुकड़े पर लगायें । रात भर ओस में रखें । सुबह खाली पेट रोजाना नियम से पन्द्रह दिन तक सेवन करें । उड़द की दाल मांस – मछली का परहेज करें । बवासीर में निश्चित लाभ होगा ।
  2. 50 ग्राम रीठे लेकर तवे पर रखकर कटोरी से ढंक दें और तवे के नीचे आधा घंटा आग जलाएं । रीठे भस्म हो जाएंगे । ठंडा होने पर कटोरी हटाकर बारीक करके रीठे की भस्म 20 ग्राम , कत्था सफेद 20 ग्राम , कुश्ता फौलाद 3 ग्राम , सबको बारीक करके मिला लें । वजन खुराक 1 ग्राम सुबह को , 1 ग्राम शाम को , 20 ग्राम मक्खन में रखकर खाएं ऊपर से 250 ग्राम गर्म दूध पियें । 10 ; 15 दिन करें , यह बहुत बढ़िया दवा है । खूनी , बादी बवासीर को दूर करेगी ।
  3. खूनी बवासीर : -गैंदे.के हरे पत्ते 10 ग्राम , काली मिर्च 5 दाने , कूजा मिश्री 10 ग्राम , 60 ग्राम पानी में रगड़कर छानकर 4 दिन तक एक – एक बार पिएं । गर्म चीज न खाएं और कब्ज न होने दें ।
  4. बवासीर का खुन बन्द करने के लिये गाय के दूध में नींबू का रस डाल कर तीन दिन तक पीना चाहिये ।
  5. दही का लगातार सेवन करने से मस्से का खून बन्द हो जाता है ।
  6. इमली के पत्तों का रस पिलाने से रक्तार्श मिटती है ।
  7. धनिये को दूध श्रीर मिश्री के साथ औटा कर पीने से अर्श मिटता है ।

बवासीर में परहेज (To refrain in piles) :-

तीखे मसाले और अत्यधिक खट्टी चीजों गोश्त , शराब , आम , अंगूर न खाएं , कब्ज न होने दें।

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