पीती (Urticaria) की { TOP 11 } होम्योपैथीक दवाएं एवं लक्षण

पीती (Urticaria) के लक्षण क्या है ?

इसमें शरीर में जगह जगह ददोड़े होकर फूल उठते हैं ; उनमें खुजली व जलन होती है । इसमें कभी – कभी अपने आप आराम आ जाता है । कभी – कभी रोगी का कष्ट अत्यन्त बढ़ जाता है ।

पीती (Urticaria) क्यों होता है?

यह रोग खाने – पीने की किसी वस्तु , किसी प्रकार के कपड़े से एलर्जी के कारण हो सकता है ।

पीती (Urticaria) की होम्योपैथी दवाएँ :-

  1. चकत्तों में डंक चुभने जैसा आभास ; जलन व खुजली । सूजन अधिक , प्यास कम या बिल्कुल न हो । दमा के रोगी में । हवा या मौसम बदलने सकता है । से बढ़े । – एपिस मैल ६ या ३० , दिन में ४ बार
  2. यदि एपिस से फायदा न हो । गर्मी लगे एवम् जलन हो ,रहयूमेटिज्म के साथ अदल – बदल कर हो । एस्केरिस के साथ हो । कसरत करने से , नहाने से बढ़े। – अर्टिकायुरेन्स Q या6 6, दिन में4 4 बार
  3. चकत्तों में जलन व खुजली , अत्यधिक बेचैनी । थोड़ा – थोड़ा पानी बार – बार पीने की इच्छा । -आर्सेनिक एल्ब ६ या ३० , दिन में ३ बार
  4. चकत्तों में जलन व खुजली , ठंड से रोग बढ़े । भीगने से , पसीने के दौरान बढ़े । – रस टॉक्स ३० , दिन में ३ बार
  5. शराब पीने के कारण पित्ती । शाम के समय रोग वृद्धि । – नक्स वोमिका ३० , दिन में ३ बार
  6. गरिष्ठ या अधिक चिकनाई युक्त भोजन करने के कारण पित्ती । प्यास कम , खुली ठंडी हवा में अच्छा लगे । रात में रोग वृद्धि । – पल्साटिला ३० , दिन में ३ बार
  7. जब रोग पुराना हो और चकत्तों में खुजली रात को बिस्तर की गर्मी से बढ़े । – सल्फर ३० , दिन में २ बार
  8. पुराने रोग में जब उपरोक्त दवाओं से फ़ायदा न हो । – ऐस्टेकस फ्लेवस ३० , दिन में २ बार
  9. छोटे – छोटे दानों के से उभार हों । रात में बिस्तर की गर्माहट एवम् मांस खाने से रोग वृद्धि ।- एन्टिम क्रूड ३० , दिन 2-3 बार
  10. मासिक के दौरान , उत्तेजना के बाद एवम् रात में रोग बृद्धि। – बोविस्टा 30 दिन में २-३ बार ।
  11. बाह्य प्रयोग के लिए , अर्टिका यूरेन्स Q , की १०-२० बूंदें एक चौथाई कप पानी में मिला २-३ बार कर चकत्तों पर लगाएं ।

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