पाइका ( PICA ) का कारण , लक्षण तथा उपचार ।

अन्य नाम – Allotriophagia

पाइका ( PICA ) किसे कहते हैं ।

पशु द्वारा ऐसी अखाद्य वस्तुओं को खाना जिन्हें आहार नहीं कहा जा सकता है । ऐसी स्थिति को पाइका कहते हैं ।

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पाइका ( PICA ) कितने प्रकार होता है ।

पाइका के कई प्रकार होते हैं । :-

  • Coprophagia – स्वयं या अन्य पशु का गोबर खाना ।
  • Osteophagia – मृत पशुओं की हड्डियां चाटना या चबाना ।
  • Geophagia – मिट्टी खाना ।
  • Infantophagia – मादा द्वारा ब्याने के बाद स्वयं के नवजात बच्चों को खाना ।
  • Pitophagia – पशु स्वयं या अन्य पशु के बाल या चमड़ी को चाटना ।
  • Licking disease – कागज , कपड़ा , चमड़ा , लकड़ी , पत्थर आदि खाना ।
  • Iron mongering – लोहे व अन्य धातु की चीजों को चाटना या चबाना ।
  • Stable vice – घोड़े द्वारा अस्तबल में अस्तबल की दीवारों को चाटना ।

पाइका ( PICA ) के लक्षण क्या है।

  • गाय – भैंस – कपड़ा , चमड़ा , गोबर , मल , मिट्टी व कागज खाती है ।
  • घोड़े – धूल , रेत , लकड़ी व menger तथा हड्डी चाटते या चबाते या खाते हैं ।
  • कुत्ते – गोबर , मल , कपड़ा , घास , खिलौने , जूते , कागज आदि खाते हैं ।

पाइका ( PICA ) के कारण क्या है ।

  • प्रायः यह रोग नमक , केल्सियम , फॉस्फोरस , अन्य खनिज तत्व व विटामिन की कमी के कारण होता है ।
  • इसके अलावा पाइका के ये लक्षण गेस्ट्राइटिस , पेन्क्रियाज के रोग , रैबीज , मसूड़ों के रोग में भी होते हैं ।
  • पेट में जब भारी संख्या में विभिन्न तरह के पैरासाइट्स हो ।
  • जब पशुओं को एक साथ संकरी जगह पर रखा जाता है तो मिट्टी खाने की संभावना अधिक रहती है ।

पाइका ( PICA ) का एलोपैथीक उपचार :-

  1. रोग के प्रमुख कारण का मालूम कर उसे दूर करें ।
  2. पशु के दिये जाने वाले आहार की पौष्टिकता में सुधार लाएं ।
  3. रुमिनेन्ट पशु को आहार में yeast powder देवें ।
  4. Inj . Vit.A UT Vit.B complex दें।
  5. गाय – भैंस को मिनरल मिक्सर 50 gm प्रतिदिन दें ।
  6. इसके लिए मिनरल ईंट को पशु को चाटने के लिए आगे रखें ।
  7. प्रतिदिन पशु को आहार में सादा नमक अवश्य दें ।
  8. समय – समय पर पेट के कीड़े की दवा जरुर दें ।

पाइका ( PICA ) का होम्योपैथिक उपचार :-

  1. कैल्केरिया फॉस ( Calc . phos ) – सप्ताह में दो बार दें । साथ में अन्य मिनरल मिक्चर भी दें ।
  2. कैल्केरिया कार्ब + कैल्केरिया फॉस ( Cal . Carb + Cal . Phos ) – इस मिक्चर को दिन में दो बार दस दिन तक दें ।
  3. कैल्केरिया कार्ब + कैल्केरिया फॉस + फेरम मेट ( Calc . Carb + Calc . phos + Ferrum mat . ) – पाइका ग्रस्त पशु की पहले डिवर्मिग करें फिर उपरोक्त मिक्चर दस दिन तक दें । चमड़ा , कागज , प्लास्टिक आदि अखाद्य चीजें खाना बंद कर देता है ।
  4. फेरम मेट ( Ferrum mat ) – यह आयरन की कमी को दूर करता है ।

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