पशुओं के कंजंक्टिवाइटिस कारण एवं उपचार । Treatment of Animal CONJUNCTIVITIS

कंजंक्टिवाइटिस ( CONJUNCTIVITIS ) किसे कहते हैं ।

आंख की गुलाबी ( Pink ) रंग की म्युकस मेम्ब्रेन को कंजक्टिवा कहते हैं और इसमें सूजन आ जाने को कंजक्टिवाइटिस ( conjunctivitis ) कहते हैं । इसका कुछ भाग खुली आंख के सामने से दिखाई देता है जबकि कुछ भाग चारों तरफ छुपा रहता है ।

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कंजंक्टिवाइटिस ( CONJUNCTIVITIS ) कितने प्रकार के होते हैं ।

लक्षणों ( lesions ) के आधार पर कंजक्टिवाइटिस के प्रकार –

  • Catarrhal Conjunctivitis – यह बहुत अधिक होता है जिसमें आंख से सफेद पीले डिस्चार्ज यानी गीड़ निकलते हैं । आंख में अडिमा के कारण सूजन आ जाती है तथा कंजेशन होने से आंख लाल दिखाई देती है ।
  • Follicular Conjunctivitis- इसमें आंख की म्युकस मेम्ब्रेन के ऊपर एक पतली झिल्ली सी जम जाती है ।
  • Purulent Conjunctivitis- भारी बैक्टीरियल इन्फेक्शन से ऐसा होता है । इसमें आंख पूरी तरह से मवादयुक्त डिस्चार्ज से भर जाती है तथा बार – बार गीड़ गिरते हैं ।
  • Granular Conjunctivitis – जब वातावरण में गर्मी के साथ उमस ( hot and humid ) होती है तब पशु इस रोग की चपेट में आते हैं । आंख की ऊपरी म्युकस मेम्ब्रेन में हल्के पीले दाने या घाव से बन जाते हैं ।
  • Vesicular Conjunctivitis- इसमें आंख की मेम्ब्रेन में कंजेशन होता है ।

कारणों ( etiology ) के आधार पर कंजक्टिवाइटिस निम्न प्रकार की होती है –

  • Viral Conjunctivitis – Infec . bovine rhinotracheitis , adenovirus infection , Infec . canine hepatitis and distemper in dog .
  • Bacterial Conjunctivitis – Staphylococcus , Streptococcus spp .. Mycoplasma , Leptospira spp . , Moraxella bovis .
  • Mycotic Conjunctivitis- Fungus ( Aspergillus , Candida ) • Parasitic Conjunctivitis – Eye worm ( Thelazia , Filarid )
  • Traumatic Conjunctivitis – Foreign body , dust , smoke . grassblade thorm injury , strong hot air etc.
  • Chemical Conjunctivitis- allergens , pollen grains , drugs .

कंजंक्टिवाइटिस ( CONJUNCTIVITIS ) का लक्षण क्या है ।

SYMPTOMS :-

  • कंजक्टिवाइटिस एकाएक ( acute ) या धीरे – धीरे भी हो सकती है तथा एक या दोनों आंख प्रभावित हो सकती है ।
  • कंजक्टिवाइटिस किसी अन्य रोग के लक्षण के रुप में भी हो सकती है ।
  • इसमें आंखों की ब्लड सप्लाई बढ़ जाती है तथा कंजेशन से आंख लाल दिखाई देती है और आंख में सूजन भी हो जाती है ।
  • रोग की प्रकृति के अनुसार आंख से निकलने वाला डिस्चार्ज पानी जैसा हल्का , गाढ़ा या पीला – गाढ़ा मवाद जैसा भी हो सकता है ।
  • कंजक्टिवाइटिस के कई दिनों तक रहने से आंख के नीचे एक ओर बार – बार डिस्चार्ज निकलते रहने से एक निशान सा ( tear mark ) बन जाता है ।
  • जांच में आंख में कोई पैरासाइट या अन्य घास का डंठल या तिनका आदि घुसा हुआ मिल सकता है ।
  • एकाएक तेज ( acute ) कंजक्टिवाइटिस में बुखार भी हो सकता है , पल्स व सांस की गति भी बढ़ सकती है । एनिमल को बार – बार छिंके आती हैं तथा दोनों आंखों से काफी आंसू निकलते हैं । पशु सुस्त हो जाता है ।
  • डायग्नोसिस आंख की जांच तथा आंख के डिस्चार्ज की जांच द्वारा ।

कंजंक्टिवाइटिस ( CONJUNCTIVITIS ) का उपचार क्या है ।

  • सबसे पहले कंजक्टिवाइटिस के कारणों को दूर करने के लिए इलाज करें ।
  • आंख की जांच करें , यदि अंदर कोई फोरेन बॉडी हो तो उसे बाहर निकालें ।
  • एनिमल को तेज धूप की बजाय ठंडी व छायादार जगह पर रखें ।
  • एंटीसेप्टिक व नॉर्मल सेलाइन से दिन में 3-4 बार आंख को धोएं ।
  • Antibiotic eye ointment – Chloramphenicol , Neomycin , Terramycin , Gentamycin आदि ointment को दिन में 2-3 बार आंख में डालें ।
  • Boric acid powder या Boro – zinc lotion भी डाल सकते हैं ।
  • Antibiotics – गंभीर कंजक्टिवाइटिस में यदि सूजन भी हो तो एंटीबायोटिक के साथ कोर्टिकोस्टेराइड्स वाला ointment का प्रयोग करें । साथ ही I / M or I / V एंटीबायोटिक्स भी दें । विटामिन – ए के इंजेक्शन भी लगाएं ।
  • Antihistaminic and steroids – एलर्जिक कंजक्टिवाइटिस में ये दोनों दें ।
  • रोग के गंभीर रुप में ऑपरेशन से eye ball को बाहर निकाला जाता है ।

कंजंक्टिवाइटिस ( CONJUNCTIVITIS ) का होम्योपैथिक उपचार ।

  • युफ्रेसिया ( Euphrasia ) :- सूजन के अलावा पानी की तरह अधिक डिस्चार्ज हो तो इसकी ड्रॉप्स आंखों में डालें ।
  • आर्सेनिकम अल्बा ( Arsenicum Alba ) :- जब आंखों से गाढा डिस्चार्ज हो तो हर दो घंटे बाद तीन दिन तक दें । सल्फर ( Sulphur ) जब आंखें लाल हो , आंसू कम हो तो दिन में चार बार तीन दिन तक दें ।
  • साइलिसिया ( Silicea ) :- जब किसी बाहरी चोट के कारण आंखों में सूजन हो , लालिमा हो , आंसू गिरते हों तो दिन में तीन बार एक सप्ताह तक दें ।
  • हिपर सल्फ ( Hepar Sulph ) :- आंख की इस व्याधि में उपरोक्त दवाएं सफल नहीं हो तो दिन में दो बार पांच दिन तक दें ।
  • सिनेरारिया ( Cineraria ) :- यह आंख के कई रोगों में लाभकारी है । पांच बूंद दिन में दो बार डालें ।

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