न्युमोनिया के कारण, आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपचार । Home treatment of Pneumonia

न्युमोनिया ( Pneumonia ) का कारण :-

जब फेफड़ों में लगातार दर्द रहने लगे तो न्युमोनिया कहलाता है । यह मुख्य रूप से ठंड लग जाने के कारण तथा फेफड़ों में सूजन आ जाने से हो जाता है । सर्दी , गर्मी में परिवर्तन एका एक पसीना आना , जीवाणुओं द्वारा संक्रमण आदि के कारण हो जाता है । इस बीमारी में फेफड़ों में कफ बढ़ जाता है । छाती में तेज दर्द रहता है । रोगी को बेहोशी आने लगती है । श्वास लेने में कष्ट होता है और खाँसी की भी शिकायत रहती है । (और पढ़ें – नींद नहीं आने (अनिद्रा) के घरेलू उपचार एवं योगा । Home treatment of Insomnia)

न्युमोनिया ( Pneumonia ) के लक्षण :-

गर्मी – सर्दी के असन्तुलन , अधिक सर्दी लग जाना , ओस में सोना , आदि कारणों से यह रोग होता है । इसमें पहले जाड़ा लगकर ज्वर आता है तथा शरीर का तापमान 102 से 107 डिग्री तक बढ़ जाता है । सिर में दर्द , वमन तथा खाँसी आदि उपसर्ग प्रकट होते हैं तथा श्वास लेने में कष्ट होता है । इस रोग का मूल कारण एक प्रकार के कीटाणु हैं । यह संक्रामक तथा खतरनाक बीमारी है जो बड़ी तेजी से बढ़ती है । छोटे बचों को यह रोग अधिक होता है ।

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न्युमोनिया रोग का सामान्य देख रेख :-

  1. रोगी को अन्धेरी अथवा ठण्डी वाली जगह में न रक्खें ।
  2. रोगी के कमरे में धुंआ भी नहीं होना चाहिए ।
  3. रोगी के फेफड़ों को हर आधा घण्टे बाद रुई के फाहे से सेकते रहें , परन्तु हृदय को बचाये रक्खें ।
  4. पाँवों को गरम पानी की बोतल से सेकें ।
  5. रोगी को श्वास लेने में कठिनाई हो तो उसकी छाती को कुछ ऊँचा रक्खें , परन्तु उसे पीठ के बल अर्थात् चित्त ही लिटायें ।
  6. रोगी को हल्के तथा गरम कपड़े पहनाने चाहिए ।
  7. रोगी की छाती तथा पसलियों पर जैतून अथवा तारपीन के तैल मालिश कर , रुई द्वारा सेकें तथा उस स्थान को रूई से दबाकर बाँध दें , रोगी को पूर्ण विश्राम एवं नींद लेने दें ।

न्युमोनिया रोग का घरेलू उपचार :-

  1. हल्दी की गांठ को बालू में भूनकर उसका चूर्ण बना लें तथा दिन में दो – बार गर्म पानी के साथ सेवन करें ।
  2. यदि बच्चों को न्युमोनिया हो जाये तो सरसों के तेल में तारपीन का तेल मिलाकर पसलियों की मालिश करें ।
  3. अदरक और तुलसी का रस बराबर मात्रा में निकालकर शहद के साथ चाटने से काफी आराम मिलता है ।
  4. मुनक्के के बीज निकालकर उसमें रत्ती भर हींग भरकर लगातार खाने से लाभ मिलता है ।
  5. बच्चों के लिये 1 चुटकी हींग पानी में घोलकर पिलाने से जमा हुआ कफ बाहर निकलता है ।
  6. चार – पाच काली मिर्च , 2 लौंग , 1 रत्ती हींगऔर चार पाँच तुलसी के पत्तों का रस इन सबको शहद के साथ मिलाकर दिन में दो बार प्रयोग करें ।
  7. तारपीन का तेल कपूर और सरसों का तेल क्रमश : 2 : 1 : 1 में मिलाकर रोगी की छाती पर मलने से बीमारी में आराम मिलता हैं ।
  8. गिलोय का सत्त – पिपल का चूर्ण शहद में मिलाकर पीने से न्युमोनिया में लाभ होता है ।
  9. घी + दूध + मिश्री + पिपल शहद इन सभी को 6 : 4 : 5 : 2 : 6 में मिलाकर काढ़ा बनाकर पीयें ।

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न्युमोनिया रोग का आयुर्वेदिक उपचार :-

  1. तुलसी के पत्ते 22 तथा कालीमिर्च 15 अदद लेकर दोनों को चटनी की भाँति पीस लें । फिर 4 छटाँक पानी को आग पर चढ़ाकर उबालें जब दो छटाँक पानी शेष रह जाय , तब उसे उतार कर छान लें तथा उसमें पूर्वोक्त चटनी मिलाकर रोगी को गुनगुना रहते ही पिला दें दिन में कई बार ऐसा करते रहने से निमोनिया का प्रभाव दूर हो जाता है ।
  2. बारहसिङ्गा का सींग 5 तोला को धीम्बार अर्थात् ग्वारपाठे के लुआव 6 तोला में रखकर ऊपर से कपड़ मिट्टी करके सुखा लें । फिर उसे 10 सेर उपलों के बीच में रखकर फूंक दें । इस प्रकार बारहसिङ्गा की भस्म तैयार हो जायगी । उस भस्म को 1 से 2 रत्ती तक की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन – चार बार चाटने से पसली का दर्द शीघ्र शान्त हो जाता है । निमोनिया की यह श्रेष्ठ औषध है । ” श्रङ्ग – भस्म ‘ नाम से तैयार भी मिलती है ।
  3. असली सिन्दूर को असली शहद में मिलाकर घोंट लें । साथ में थोड़ा कपूर भी डाल लें । फिर जितने स्थान में दर्द हो , उतना ही बड़ा सफेद कपड़ा लेकर , उसके ऊपर उक्त मिश्रण का लेप करें तथा उस कपड़े को दर्द वाले स्थान पर चिपकाकर ऊपर से पट्टी बाँध दें । इससे पसलियों का दर्द दूर हो जायगा ।
  4. सफेद फिटकरी तथा अच्छी कालीमिर्च- दोनों को 1-1 तोले लें और पीसकर कपड़छन करलें । उसे शीशी में भरकर डाट लगाकर रख दें । 1 तोला शहद में 3 माशे इस चूर्ण को मिलाकर रोगी को चटा दें । यदि एक मात्रा से आराम न हो तो 40 मिनट बाद ही दूसरी मात्रा दे दें । इससे पसली के दर्द में तुरन्त आराम होगा ।

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न्युमोनिया का यूनानी चिकित्सा :-

  1. बारहसिंहा का सींग 1 तोला लेकर , उस पर अजवायन और शोराकलमी 1-1 तोला को थोड़े – से पानी में पीसकर लेप कर दें । फिर उसे 2 सेर कोयलों की आग रक्खें । जब आग ठण्डी हो जाय , तब बारहसिंघे के सींग की डली को निकालकर महीन पीस लें । निमोनिया तथा पसली के दर्द में इस चूर्ण को 2 से 4 रत्ती तक की मात्रा में एक तोला शुद्ध शहद में मिलाकर सुबह – शाम चटायें तथा बारहसिंघे के सींग को पानी में घिसकर , उसमें थोड़ी – सी कालमिर्च पीसकर हल्का गरम करें और उसे दर्द वाली जगह पर लगायें । इससे लाभ होगा ।
  2. तारपीन के तेल की मालिश करने से निमोनिया तथा पसली के दर्द में बहुत फायदा होता है ।
  3. अरण्ड की जड़ 6 माशा तथा सोंठ 3 माशा को पानी में उबाल कर छान लें । फिर उसमें 2 तोला शहद मिलाकर रोगी को पिलायें

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