दूब घास के औषधीय गुण (Medicinal uses of Cynodon Dactylon) in 2021

हरि दूब से बच्चा बच्चा परिचित है और यह सारे देश में हर जगह जमीन पर पाई जाती है दुब बड़ी उपयोगी और शरीर व स्वास्थ्य के लिए अत्यंत गुणकारी है । यहां तक की पूजा पाठ में , भगवान गणेश जी की पूजा में विशेषकर इसका उपयोग होता है। सुबह सूर्योदय के समय इस पर नंगे पैर टहलना सुहाना भी लगता है और नेत्रों की ज्योति और सिर के बालों के लिए लाभदायक भी होता है इसका प्रमुख गुण त्वचा व रक्त के दोष व विष विकार को दूर करना है इसके अलावा यह कषाय व मधुर रस युक्त, हल्की, विपाक में मधुर शीतविर्य होती है अंता रक्तस्राव को रोकने वाली, मूत्रल, दाहं सामक, शीतल और तरावत देने वाली होती है।

इसके प्रयोग और फायदे

मुट्ठी भर हरी ताजी दुब उखाड़कर सोर सहित साफ पानी से दो-तीन बार अच्छी तरह धोकर साफ कर ले । एक गिलास पानी में यह दुब, 5 काली मिर्च और 1 पान का पता (खानेवाला पान) डालकर अच्छी तरह उबाले । जब पानी एक चौथाई भाग बचे तब छानकर सुबह खाली पेट पीएं। इस काढ़े के सेवन से त्वचा पर होने वाली फुंसी, खाज खुजली और त्वचा की अन्य ब्याधियां नष्ट होती है। सुबह ठंडे समय या ठंड लगने पर जिनको छींके आती हैं उनको या काढ़ा पीने से लाभ होता है।

सिर्फ हरी दूब को पानी में धो साफ करके सील पर रखें, थोड़ी सी शक्कर ऊपर से बुरक कर , पानी का छींटा मारते हुए बट्टे से अच्छी तरह पीसे और पानी डालते हुए कपड़े से छानकर रस निकाल लें। इस रस को सुबह खाली पेट एक गिलास मात्रा में पिए और इसके 1 घंटे बाद तक कुछ खाए पिए नहीं। कम से कम 45 दिन तक सेवन करने से हिमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है। पेशाब में जलन व रुकावट दूर करने के लिए और महिलाओं का रक्त प्रदर और श्वेत प्रदर रोग दूर करने में भी यह अत्यंत गुणकारी सिद्ध होता है। श्वेत प्रदर दूर करने के लिए घर में जमाए हुए ताजे बिना कटे हुए दही के साथ और रक्त प्रदर दूर करने के लिए ठंडे दूध के साथ मिलाकर दूब का यह रस पीना चाहिए।

यह रस मोटापा दूर करता है, कोलेस्ट्रोल कम करता है और उच्च रक्तचाप को सामान्य करता है कमजोर दुबले पतले शरीर वाला सेवन करे तो उसका शरीर बलवान और पुष्ट होता है स्वस्थ शरीर वाला भी पिए तो उसका स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

ध्यान रखने वाली बातें

दूब का चुनाव करते समय ध्यान रखें कि छोटी और बिल्कुल हरे रंग की दुब न चुनें सुनहरे हरे रंग की, लंबे और सुइ की तरह नुकीले पतले पत्तों वाली दूब हि चूने। इसका प्रयोग वर्ष भर में किसी भी ऋतु के निरापद रूप में किया जा सकता है ।

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