दमा का कारण, आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपचार । Home treatment of Asthma

दमा (Asthma) किसे कहते हैं।

जब फेफड़ों में जकड़न एवं संकुचन होने के कारण साँस लेने में तकलीफ हो तो यह दमा की स्थिति कहलाती है ।

दमा (Asthma) होने का कारण क्या है ।

ज्यादातर यह रोग अधिक उम्र के लोगों को होता है । धूल और धुआँ भरे महौल में रहने के कारण भी यह हो सकता है । प्रायः यह रोग अनुवांशिक होता है । अत्यधिक धुम्रपान करने वालों को भी यह रोग होता है ।

दमा (Asthma) लक्षण क्या हैं।

इसमें रोगी को साँस लेने में तकलीफ होती है यह तकलीफ कभी कम कभी ज्यादा घटती – बढ़ती रहती है । कभी – कभी खाँसी के साथ कफ निकलता है तो रोगी को आराम मिलता है । बलगम न निकले तो रोगी का हाल बेहाल हो जाता है ।

(और पढ़ें – एलर्जी का होम्योपैथिक उपचार )

दमा के घरेलू उपचार :-

  1. अडूसे के पत्तों को पानी में भिगोकर उनका रस निकालकर तथा उसमें तुलसी का रस मिलाकर लेने से दमा में काफी आराम मिलता है ।
  2. तेजपात के पत्तों का चूर्ण अदरक के रस के साथ लेने से दमे में काफी लाभ होता है ।
  3. प्रातः काल खाली पेट 3-4 चम्मच अदरक का रस शहद के साथ लेने से काफी आराम मिलता है ।
  4. रात्रि विश्राम से पूर्व सौंठ + भारंगी + बड़ी हरड़ तीनों को समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनायें और 1-1 चम्मच चूर्ण गर्म पानी के साथ लें ।
  5. 250 ग्राम पानी में 2 चम्मच मुलहठी डालकर काढ़ा बनायें और जब पानी 1/4 रह जाये तो रोज सुबह – शाम खाने के बाद इस काढे को पीयें ।
  6. तुलसी के पत्तों के साथ 2-3 काली मिर्च चबाने से रोग में आराम मिलता है ।
  7. अदरक के साथ निंबू का रस चूसने से भी आराम मिलता है ।
  8. नींबू का रस शहद में मिलाकर चाटने से दमा व खाँसी में आराम मिलता है ।
  9. 250 ग्राम अदरक का रस , 250 ग्राम शुद्ध देशी गाय का घी अलग अलग कांसे के बर्तन में गर्म करें । ठंडा होने के बाद आपस में मिला दें । प्रतिदिन 1 गिलास गाय के दूध में इस योग की 1 चम्मच दवाई डालकर तथा 1 चम्मच शहद मिलाकर पीने से दमा में काफी सुधार होता है ।
  10. जब दमे का दौरा पड़े उस समय जरा सी फिटकरी जीभ पर रखकर चुसने से तुरंत आराम मिलता है ।
  11. रोगी की छाती को गर्म पानी के सेंक से काफी आराम मिलता है ।
  12. श्वास फुलने के दौरान गर्म पानी पीने से आराम मिलता है ।
  13. सेंधा नमक और देशी गाय का घी मिलाकर छाती पर मलन से काफी आराम मिलता है ।
  14. नियमित गेहूँ रोप रस पीने से भी काफी आराम मिलता है ।
  15. शलजम + गाजर + पत्तागोभी कारस समान मात्रा में मिलाकर पीयें ।
  16. पीपल के फल का चूर्ण 1-1 चम्मच सुबह – शाम लेने से लाभ मिलता है ।
  17. 3 चम्मच मेथी 1 गिलास पानी में उबालें , आधा पानी रहने पर उसे छानकर पियें ।
  18. हार सिंगार की छाल का चूर्ण पान के साथ खाने से दमा में काफी आराम मिलता है ।
  19. तुलसी और अदरक का रस बराबर मात्रा में शहद के साथ लेने से , आराम मिलता है ।
  20. तुलसी के पत्ते काली मिर्च – लौंग – समान मात्रा में ( 5-5 ) पीसकर प्रतिदिन खायें ।
  21. 1 चम्मच मुलहठी 1 चम्मच देशी गाय का घी 1 चम्मच मिश्री और आधा चम्मच सेंध नमक इन सबको 100 ग्राम पानी में औटाकर पानी का सेवन करें ।
  22. बेलपत्रों का रस अडूसे के पत्तों का रस तथा सरसों का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है ।
  23. लहसुन की कच्ची कली पर लौंग के तेल की दो – तीन बूंदे चबायें और गर्म पानी पीयें । दमा के दौरे नहीं पडेंगें ।
  24. लौंग का काढ़ा बनाकर उसमें शहद मिलाकर पीयें ।
  25. आधा गिलास मौंसबी के रस में थोड़ा गर्म पानी , भुना हुआ जीरा और सौंठ का पावडर मिलाकर पीने से लाभ होता है ।
  26. पुरानी हल्दी को पिसकर चूर्ण बनायें और दो चम्मच शहद में मिलाकर चाटें । यह नुस्खा दमा के लिये रामबाण औषधी है । सर्दी जुकाम (cold, catarrh) का होम्योपैथी इलाज

दमा का आयुर्वेदिक उपचार :-

  1. हल्दी , राई , लोटन सज्जी चार – चार तोले । गुड़ पुराना १८ तोला कूट – छानकर वेर के समान गोली बनाना और सुबह शाम खाना । चालीस दिन में सांस आराम होगा ।
  2. आक का पका पत्ता एक लो उसमें २५ काली मिर्च घोटकर काली मिर्च के समान गोली बनाओ । बड़े आदमी को एक और छोटे को २ गोली दो । फायदा करेगा ।
  3. शोरा कलमी लेकर पानी में भिगोदो । उसमें एक साफ़ कपड़ा अच्छी तरह तर करके छाया में सुखालो । उसकी बत्ती बनाकर सिगरेट की तरह बीमार को पिलायो । इससे आनन फानन सांस का उठता हुआ जोर कम हो जायगा । पर यह सिगरेट होशियारी से पिलानी चाहिए । क्योंकि वह एकदम जल जाती है । इसके लिए किसी चीज़ की नलकी बनानी चाहिए ।
  4. मोर पंख की चन्द्रिका जलाकर कुल्हिया में राख करलो । दो – दो रत्ती राख शहद में सुबह – शाम खाओ । फायदा होगा ।
  5. तमाखू का गुल आग में सफेद जलाकर पोसो , दो रत्ती पान में रखकर खाये । खट्टी बादी चीजों से परहेज करे तो सांस को आराम होगा ।
  6. थोड़े से गेहूँ कोरे शकोरे में रख , जलाकर राख करलो । फिर इनकी बरावर हल्दी को जलालो , दोनों को मिलाकर कूट लो । पहले दिन पाँच मांशे ठण्डे या गर्म पानी से लेवे । फिर रोज एक कौड़ी – भर बढ़ाता जाय , २१ दिन में आराम हो जायगा ।
  7. तमाखू की हरी पत्तियों का रस एक पाव निचोड़े , उसमें पाव – भर पुराना गुड़ डालकर औटावे । जब शर्बत बन जाय , छान कर रखे । दो तोला पीवे । उल्टी , दस्त हो जाय तो थोड़ा पीवे । धीरे – धीरे बढ़ावे । इससे पांच – छ दिन में ही आराम हो जायगा ।

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