तुलसी कितने प्रकार की होती है। और तुलसी की उपयोगिता।

तुलसी का आम भारतीय जन – जीवन में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है । किन्तु इसे खुले में रखना ही श्रेयस्कर रहता है । यानी इसे बन्द कमरे में अन्य सजावटी पौधों की तरह स्थान नहीं दिया जा सकता । तुलसी सर्वगुण सम्पन्न होते हुए भी घर – गृहस्थी में शामिल नहीं की जाती , बल्कि आंगन तक ही सीमित रहती है । हमारे यहाँ तुलसी की पूजन की भी प्रथा है । तुलसी में अनेक औषधीय गुण भी हैं , जो निम्नवत हैं रोज सुबह खाली पेट डेढ़ चम्मच तुलसी का रस या दस तुलसी की पत्तियाँ चबाने से रक्त शुद्ध होता है , गले और पेट के दर्द से मुक्ति होती है , सीने में होने वाले संक्रमण रुक जाते हैं ।

1.रोज सुबह खाली पेट डेढ़ चम्मच तुलसी का रस या दस तुलसी की पत्तियाँ चबाने से रक्त शुद्ध होता है , गले और पेट के दर्द से मुक्ति होती है , सीने में होने वाले संक्रमण रुक जाते हैं ।

2.बराबर मात्रा में अदरक और तुलसी का रस शहद में मिलाकर रोज सेवन करने से गठिया , साइटिका के दर्द समाप्त होते हैं और गैस की समस्या से भी छुटकारा मिल जाता है ।

3.अधेड़ उम्र के लोगों की नेत्र ज्योति प्रायः कमजोर हो जाती है , यदि वे दो बूंद तुलसी का रस आँखों में डालते हैं तो बहुत लाभ होगा ।

4.स्त्रियाँ यदि सुबह तुलसी की दस पत्तियाँ एक ग्लास पानी के साथ लें , तो मासिक धर्म के समय होने वाली मरोड़ से छुटकारा मिल जायेगा । यदि यह ऐंठन बहुत ज्यादा हो तो 30 मिली . तुलसी का रस 41 दिन तक लगातार लेने से वह रोग हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है ।

5.चर्मरोग पर तुलसी की ताजी पत्तियों के रस में नीबू रस बराबर मात्रा में मिलाकर लगायें , इससे सभी प्रकार के चर्मरोग ठीक हो जाते हैं ।

6.सर्दी , जुकाम , खांसी होने पर तुलसी की ताजी पत्तियाँ एवं अदरक के रस को शहद के साथ मिलाकर सेवन करें तो लाभ मिलेगा ।

7.तुलसी की ताजी पत्तियों को धीरे – धीरे चबाने से दांत दर्द में राहत मिलती है ।

8.तुलसी की ताजी पत्तियों के रस को गुनगुना गरम कर कान में डालें , कान का दर्द तुरन्त मिट जाता है ।

9.तनावग्रस्त व्यक्तियों को चाहिए कि वह सुबह – शाम तुलसी की ताजी पत्तियों को चबायें , जिससे राहत मिलती है ।

10.तुलसी की ताजी पत्तियों के रस को कपूर एवं शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से कफ की बीमारी कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है ।

11.तुलसी के पत्तियों के चूर्ण को मिश्री के साथ सेवन करने से उल्टी का आना बन्द हो जाता है ।

12.मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों को चाहिए कि वे खाली पेट नियमित तीन सप्ताह तक तुलसी की पाँच ताजी पत्तियाँ पाँच काली मिर्च के साथ सेवन करें ।

तुलसी कितने प्रकार की होती है?

तुलसी के पौधे में अनेकों गुण पाए जाते हैं। तुलसी न केवल धार्मिक रूप से बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी बहुत गुणकारी मानी जाती है क्योंकि तुलसी में अनेकों औषधीय गुण पाए जाते हैं।पृथ्वी पर पांच तरह की तुलसी पाई जाती है। जिसमें राम तुलसी, श्याम तुलसी, श्वेत विष्णु तुलसी, वन तुलसी, नींबू तुलसी शामिल है। लेकिन घरों में मुख्य रूप से राम तुलसी या श्याम तुलसी ही रखी जाती है।

शास्त्रों के अनुसार देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह को सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। तुलसी विवाह से न केवल शुभफलों की प्राप्ति होती है बल्कि कन्यादान जैसे शुभ फलों की प्राप्ति भी होती है।

घर में मुख्य रूप से राम तुलसी और श्याम तुलसी ही रखी जाती है। अन्य तुलसियों को घर में रखना शास्त्रों के अनुसार उचित नहीं माना जाता।

तो इसलिए राम तुलसी से किया जाता है शालिग्राम का विवाह

हल्के हरे रंग के पत्ते और भूरी छोटी मंजरी व पत्तियों वाली तुलसी को राम तुलसी कहा जाता है। इस तुलसी की टहनियां सफेद रंग की होती है। इसकी शाखांए भी श्वेतार्क वर्ण लिए होती है। इसकी गंध और तीक्ष्णता कम होती है।

राम तुलसी का प्रयोग कई त्वचा संबंधी औषधियों के रूप में किया जाता है। श्याम तुलसी से ज्यादा राम तुलसी का पौधा घर में अत्यधिक मिलता है। इतना ही नहीं इसे धार्मिक रूप से अधिक प्रयोग किया जाता है।राम तुलसी से होता है शालिग्राम का विवाह 

माना जाता है कि जिस समय वृंदा ने अपने शरीर का त्याग किया था तो उस समय उसकी राख से जो तुलसी का पौधा उगा था वह हल्के हरे रंग का था यानी वह पौधा राम तुलसी था। इसलिए धार्मिक रूप से राम तुलसी का अधिक प्रयोग किया जाता है।

इतना ही नहीं देवउठनी एकादशी पर शालिग्राम का विवाह जिस तुलसी से कराया जाता है वह राम तुलसी ही होती है।

ऐसी होती है श्याम तुलसी

श्याम तुलसी राम तुलसी से ज्यादा गुणकारी होती है। श्याम तुलसी को कृष्ण तुलसी या काली तुलसी भी कहा जाता है। इसके पत्ते हल्के जामुनी या कृष्ण रंग के और इसकी मंजरी जामुनी रंग की होती है। श्याम तुलसी की शाखाएं लगभग एक से तीन फुट ऊंची और बैंगनी आभा वाली होती है।इसके पत्ते एक से दो इंच लंबे एंव अंडाकार या आयताकार आकृति के होते हैं। कृष्ण तुलसी का प्रयोग विभिन्न प्रकार के रोगों और कफ की समस्या के लिए होता है।

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