चेचक ( Small Pox ) का उपचार

चेचक संक्रमित बीमारी है । एक तरह के जीवाणु के कारण यह रोग होता है । यद्यपि चेचक का उन्मूलन हो चुका है । अब चेचक का रोग नहीं होता । परन्तु फिर भी हम इसकी होम्योपैथिक चिकित्सा में प्रयोग होने वाली कुछ दवाएं यहां पर दे रहे हैं ।

  • प्रतिरोधक दवा ( रोग की प्रत्येक अवस्था में उपयोगी ) । :- वैरियोलिनम २०० , या 1M , की २-३ खुराक हर १०-१५ मिनट के अंतर से
  • तेज़ बुख़ार , बेचैनी व डर । :- एकोनाइट ३० , हर १-२ घंटे बाद
  • तेज़ बुख़ार , बहुत तेज़ सिरदर्द , और रोगी बेहोशी सी में हो , तेज़ शोर सहन न हो । :- बैलाडोना ३० , हर १-२ घंटे बाद
  • जब दानों का रंग काला हो , दानों से खून बहता हो । बेचैनी और सुस्ती हो । थोड़ा – थोड़ा पानी पीने की इच्छा हो । :- आर्सेनिक एल्ब ३० , दिन में ३-४ बार
  • चेचक की किसी भी अवस्था में इस औषधि का प्रयोग किया जा सकता है । यदि पहले ही इसका प्रयोग किया जाए तो रोग की तेज़ी घट जाती है । इस दवा में चेचक के दाग दूर कर देने की भी क्षमता है। :- एन्टिम टार्ट ३० , सिर्फ ३ खुराक हर आधे घंटे बाद
  • जब बहुत जल्दी मवाद भरे दाने निकल आएं । मवाद में बदबू हो ; इस दवा में प्रतिरोधक तथा उपचारात्मक दोनों गुण हैं। :- थूजा ३० या २०० , आवश्यकतानुसार
  • जब चेचक के दाने पकने लगें , गले में ज़ख्म , खून । । मिले दस्त हों ।:- मर्क सौल ३० , दिन में ३ बार

सामान्य देख – रेख : दूध , साबूदाना , सब्ज़ियों , या फलों का रस , साग का रसा , मूग , या मसूर की दाल का सूप बनाकर दें ( मांस , मछली बिल्कुल न दें ) ।

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