पशुओं के शरीर पर पाये जाने वाले चीचड़े का उपचार । TREATMENT OF TICKS INFESTATION

छोटे बड़े पशुओं के शरीर पर पाये जाने वाले बाहरी परजीवियों ( ectoparasites ) में चीचड़े ( ticks ) ही सबसे अधिक नुकसानकारी होते है । शरीर की कई जगहों पर गोल , अंडाकार , चपटे कई तरह के टिक्स चिपके रहते हैं । वैसे तो कई तरह के पैरासाइट्स होते हैं लेकिन मोटे तौर पर Ixodiae ( हार्ड ठिक्स ) और argasidae ( सॉफ्ट टिक्स ) फैमिली के पैरासाइट्स को ही टिक्स कहते हैं।

1 . HARD TICKS – Family – Ixodiate

Genus – Ixodes , Haemaphysalis , Dermacentor , Amblyomma , Boophilus , Hyalomma , Rhicephalus .

पशुओं के शरीर पर पाये जाने वाले चीचड़े का जीवन चक्र । LIFE CYCLE OF TICKS INFESTATION

ये टिक्स पशुओं के स्वास्थ्य व पशु उत्पादन की द ष्टि से काफी महत्वपूर्ण है , क्योंकि ये ही पशुओं के शरीर पर अधिक पाये जाते हैं । इनके शरीर की ऊपरी सतह कठोर कवच से ढकी होती है । अन्य टिक्स की तरह ये भी होस्ट एनिमल पर कम दिन ही चिपके रहते हैं । इनमें से कुछ अपने जीवनचक्र को एक प्रजाति के एनिमल पर तो कुछ दो व कुछ तीन प्रजाति के एनिमल पर पूरा करते हैं । प्रायः ये पशु के कान पर अधिक चिपके होते हैं जिससे पशु बार बार कान हिलाता है ।

फीमेल टिक्स बड़ी संख्या में अंडे देती है । अण्डों से लार्वा निम्फ तथा एडल्ट अवस्थाएं होती है । विचित्र बात यह है कि कई चींचड़ों की अलग अलग अवस्थाएं अलग अलग प्रकार के रोगों के प्रोटोजोआ पैरासाइट्स को अपने अंदर आश्रय दिये हुए होती है । स्वस्थ पशु का खून चूसते समय इन प्रोटोजोआ को अन्य पशु के शरीर में डाल देते हैं ये मुख्य रूप से बबेसियोसिस , थैलेरिओसिस , एनाप्लाज्मोसिस जैसे रोग फैलाते हैं ।

इसे देखें – पशुओं के पथरी का कारण , लक्षण तथा उपचार । TREATMENT OF URINARY CALCULI

टिक्स किस तरह नुकसान पहुंचाते है ?

  • त्वचा पर चिपक कर घाव बनाते हैं जिससे बैक्टीरीयल इन्फेक्शन भी हो सकता है ।
  • होस्ट एनिमल का काफी ब्लड चूसकर उसे एनीमिक व कमजोर बना देते हैं ।
  • ये वाइरस , बैक्टीरिया , रिकेट्सयल व प्रोटोजोआ रोग फैलाते हैं ।
  • त्वचा को बार बार काटने व जलन से डर्मेटाइटिस हो जाती है ।
  • टिक्स द्वारा छोड़े टॉक्सिन से पशु के पिछले पैरों का पैरालाइसिस हो जाता है ।
  • त्वचा को जगह जगह काटने से पशु के चमड़े की क्वालिटी खराब हो जाती है ।

पशुओं के शरीर पर पाये जाने वाले चीचड़े का उपचार । TREATMENT OF TICKS INFESTATION

  • Family – Ixodiate
  • Gamaxin powder – 1 %
  • Liridane powder – 1 %
  • Malathion – 0.5 %
  • D.D.T. , B.H.C. – 10 %
  • Inj . ivermectin – 2ml / 50 kg . b.wt , S / C

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