कब्ज का घरेलू एवं आयुर्वेदिक ईलाज

अत्यधिक मानसिक चिंता व अव्यवस्थित जीवन शैली कब्ज का बहुत बड़ा कारण होती है , अत : इनसे दूर रहते हुए खुश रहने का प्रयास करना चाहिए तथा जीवन शैली को सदा व्यवस्थित रखना चाहिए ।

सब प्रकार की बीमारियों का कारण मल का कुपित होना है । कब्ज ज्यादातर बीमारियों का मूल कारण है । अतः इससे दूर रहने के कुछ अनुभूत घरेलू नुस्खे यहाँ पर दिये जा रहे हैं , जिन्हें प्रयोग करके आप अपने आपको कब्जमुक्त कर सकते हैं।

मुनक्का:-10-12 मुनक्के दूध में उबालकर सेवन करें । यह प्रयोग 8-10 दिन तक करें , इससे पुराना से पुराना कब्ज भी दूर हो जाता है । प्रात : उठकर बिना कुछ खाए 4 दानें मुनक्के खाने से भी कब्ज दूर होता है ।

हरड़:-हरड़ का चूर्ण एक छोटा चम्मच दाल के पानी के साथ लें कब्ज दूर करने की रामबाण औषधि है । पूरी पेट की सफाई हो जाती है ।

मैथी:-सुबह शाम मैथी – दाना निगलने से कैसा भी कब्ज हो दूर हो जाता है , मैथी दाना पेट में जाकर फूलता है आँतों को चिकना एवं तर कर देता है , साथ ही मल की गुठलियाँ बनने नहीं देता ।

टमाटर:-कब्ज टमाटर से भय खाता है , अतः कब्ज के रोगियों को टमाटर का सेवन करना चाहिए , कुछदिनों तक टमाटर का सूप पीना चाहिए , टमाटर में सेल्यूलोज होता है जो कब्ज को दूर करने में सहायक होता है ।

अमरूद:-अमरूद का सेवन भी कब्ज नाशक है , पूरे मौसम अमरूद सेवन किया जाये तो कब्ज नहीं हो सकता ।

संतरा:- संतरे का रस खाली पेट पीने से पुराना अथवा बिगड़ा हुआ कैसा भी कब्ज हो ठीक हो जाता है ।

पपिता:-लों में पपीते का महत्वपूर्ण स्थान है , इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं जो कि 3-4 घन्टों में सब कुछ पचाकर पुनः भूख लगा देते हैं , अतः प्रात : काल के समय व शाम को भोजन के बाद पपीता खायें ।

सेब:-खाली पेट में दो सेब दाँतों से काटकर खाने से कब्ज दूर होता है ।

कब्ज का आयुर्वेदिक उपचार:-

1. रात को सोते समय तांबे के लोटे में पानी भरकर उसमें 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण (एक चम्मच) डाल कर ढक दें। सुबह खाली पेट छानकर पीने से कुछ दिनों के प्रयोग के बाद कब्ज रोग जड़ से खत्म हो जाएगा।

2.एगरोल 2 चम्मच , आधा कप ताजा पानी में मिलाकर 3-4 दिन पियें । पुरानी कब्ज ठीक होगी । एगरोल केमिस्ट की दुकान से लें ।

3.कब्ज की अधिकता के कारण यदि बुखार में दस्त कराना हो तो 10 ग्राम अरण्डी के तेल को 250 ग्राम गर्म दूध में मिलाकर पिला दें ।

4.गुठली निकाली हुई बड़ी हरड़ का मुरब्बा एक या दो नग खिलाकर ऊपर से 250 ग्राम दूध पिला देने से ही 3-4 दस्त हो जाते हैं । नाजुक मिजाज रोगी को 1 हरड़ से ज्यादा नहीं देनी चाहिए ।

5.साधारण कब्ज की स्थिति में रात को सोते समय दस – बारह मुनक्के लें और उनके बीज निकालकर दूध में उबालकर खाएं और ऊपर से वही दूध पी लें । इससे प्रातः खुलकर शौच आएगा । कब्ज की अधिक शिकायत होने पर इसे 3 दिन लगातार लें ।

6.पुराना बिगड़ा हुआ कब्ज हो तो संतरों का रस खाली पेट प्रातः 8-10 दिन पीने से ठीक हो जाएगा । संतरों के रस में नमक , बर्फ या मसाला इत्यादि नहीं मिला हुआ होना चाहिए ।

7.पीली काबली हरड़ को रात में भिगो दें और प्रात : हरड़ को पानी में थोड़ा – सा रगड़ें और थोड़ा – सा नमक मिलाकर पिला दें । इससे कब्ज चाहे जितनी पुरानी हो वह दूर हो जाएगी । एक हरड़ 5-6 दिन तक काम करती है ।

8.10 ग्राम ईसबगोल की भूसी 125 ग्राम दही में घोलकर सुबह – शाम खिलाने से कब्ज ठीक होती है ।

9.6 ग्राम त्रिफला चूर्ण 200 ग्राम गर्म दूध में लेने से कब्ज की शिकायत दूर होती है ।

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