पशुओं के एस्केरिओसिस (कृमि) का कारण, लक्षण तथा उपचार । TREATMENT OF ASCARIOSIS

Synonym- Round worm disease

एस्केरिओसिस भी छोटे व बड़े पशुओं का एक प्रमुख परजीवी रोग है । लंबे व गोल एस्कोरिस संख्या में भारी व द्धि कर आंत व बाइल डक्ट को पूरी तरह बंद कर देते हैं जिससे कभी कभी छोटी आंत फट भी जाती है । इस रोग से पशु कमजोर हो जाते हैं । कम उम्र के रोगी बछड़ों व कटड़ों में बहुत कम ग्रोथ होती है ।

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एस्केरिओसिस का जीवन चक्र क्या है । LIFE CYCLE OF ASCARIOSIS

Neoascaris vitulorun – गाय भैंसों की आंतों में पाया जाने वाला यह सबसे बड़ा पैरासाइट है ।

लगभग सभी एस्केरिस का जीवनचक्र एक सा ही होता है सिर्फ निओएस्करिस कोलोस्ट्रम व गर्भाशय द्वारा फैलता है । व्यस्क एस्केरिस रोगी पशु की आंत में 2-5 वर्ष तक जीवित रह जाते हैं । रोगी शरीर में ये प्रतिदिन हजारों की संख्या में अंडे देते हैं । नर व मादा अलग अलग होते हैं । अंडे गोबर के साथ बाहर निकलते रहते हैं | बाहर सर्दी , गर्मी का इन पर कोई असर नहीं पड़ता है तथा वर्षों तक जीवित रहते हैं लेकिन रेतीले क्षेत्र में तेज सीधी धूप से ये कुछ सप्ताहों में नष्ट हो जाते हैं । इन्हीं अंडों से दूषत चारा , पानी आदि का खाने से स्वस्थ पशु भी रोगग्रस्त हो जाते हैं ।

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एस्केरिओसिस का कारण क्या है । PATHOGENESIS OF ASCARIOSIS

रोग के लक्षण ( lesion ) आंतों की दीवारों में पड़ते हैं । बड़े आकार के व्यस्क एस्कारिस आंत में संख्या में वृद्धि कर गुच्छों का रूप धारण कर लेते हैं और आंत में रूकावट कर पूरी तरह बंद कर देते हैं । यहां से एस्कारिस के लार्वा जब माइग्रेट कर लिवर व फेंफड़ों में पहुंच जाते हैं तो वहां भी नुकसान पहुंचाते हैं । लिवर में ये फाइब्रोसिस पैदा करते हैं जिससे लिवर पर जगह जगह सफेद धब्बे से बन जाते हैं । फेंफड़ों में ये alveoli में चोट तथा अडिमा पैदा करते हैं ।

एस्केरिओसिस का लक्षण क्या है । CLINICAL FINDINGS OF ASCARIOSIS

CATTEL –

  • बछड़ों में दस्त , पेट दर्द , सुस्ती ।
  • रूखी ( rough ) त्वचा , पशु की कम ग्रोथ तथा बछड़े व कटड़े मुरझाए हुए ( dull ) से लगते हैं ।
  • शरीर में पैरासाइट अधिक संख्या में होने पर पेट दर्द , तड़फना ।
  • अधिकतर कटड़ों ( Buffalow calves ) की मौत ( high death rate ) .

Horse –

  • घोड़ी के बछड़ों ( Foals ) में गाय के बछड़ों ( Calves ) जैसे ही लक्षण होते हैं ।
  • लेकिन बड़े घोड़ों में एस्केरिस पेरिटोनियल केविटी में भी पाये जा सकते हैं , जिससे पेरिटोनाइटिस हो सकती है ।
  • कम ग्रोथ रेट , दस्त तथा पेट दर्द होता है ।

एस्केरिओसिस का डायग्नोसिस कैसे करें । DIAGNOSIS OF ASCARIOSIS

  • Clinical findings

एस्केरिएसिस कम उम्र के पशुओं में अधिक होता है ।

कम ग्रोथ रेट तथा रूखी त्वचा

माइक्रोस्कोप में गोबर में एडल्ट व अंडे दिखाई देते हैं |

एस्केरिओसिस का उपचार क्या है । TREATMENT OF ASCARIOSIS

  • Piprazine – very common and effective salt

-100-400mg / kg b.wt. , in horse and cattle

  • Vermex –

Sheep , calf and foal – 1 ml / 2.5 kkgk b.wt.

Cat and dog — 1ml./4.5 kg b.wt.

  • Levamisole – 10 mg./kg . b.wt.
  • Thiabendazole – Suitable for large animals .

80 – 100 mg / kg b.wt.

  • Mebendazole – 500 mg / 100 kg b.wt.

एस्केरिओसिस का रोक थाम क्या है । CONTROL OF ASCARIOSIS

  • गोबर का अच्छी तरह से घर से दूर निस्तारण करें ।
  • छोटे बछड़ों , बछड़ों व कटड़ों की बड़ी उम्र के पशुओं से अलग रखें ।
  • ग्याभन पशु में एस्केरिस नहीं हो , इसके लिए गर्भकाल में ही उचित समय पर उपयुक्त Anthelmintic दें ।

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