एफ्लाटॉक्सिकोसिस का कारण तथा उपचार । TREATMENT OF AFLATOXICOSIS

Synonym – Mycotoxicosis

हमारे समाज में पशुओं को बचा हुआ सड़ा खाना देना तथा फंगस लगी हुई चीजें खिलाना एक सामान्य बात है । वैज्ञानिकों का मानना है कि ये फंगस माईकोटोक्सिन नामक टॉक्सिन पैदा करती है जो मनुष्य व पशुओं के लिए कफी हानिकारक है । सन 1960 में एफ्लटॉक्सिन की खोज की गई । प्रायः देखा गया है कि जो अनाज मनुष्य उपयोग हेतु ठीक नहीं माना जाता है , फफूंद लगा होता है ऐसे अनाज को पशुओं को खिलाने से एफ्लटॉक्सिस हो जाती है ।

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एफ्लाटॉक्सिकोसिस का कारण क्या है । ETIOLOGY OF AFLATOXICOSIS

Aspergillosis flavus and aspergillus नामक फंगस से विषैला पदार्थ एफ्लाटोक्सिन पैदा होता है । ये चार प्रकार के होते हैं । ये पानी में नहीं घुलते हैं तथा इन पर गर्मी का कोई खास असर नहीं होता है । मूंगफली , कपास के बिनौले तथा कुछ अन्य प्रकार के दानों में फंगस द्वारा एफ्लाटॉक्सिन जल्दी बनता है । इसका इन्फेक्शन फसल काटने से पहले , काटने के बाद , दाने को भंडारित करते समय तथा कई बार मौसम में आई एकाएक नमी व बरसात के कारण हो सकता है ।

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एफ्लाटॉक्सिकोसिस का प्रभाव । Toxicity in Animals

लगभग सभी तरह के पशु पक्षी एफ्लटॉक्सिन से प्रभावित हो सकते है , फिर भी प्रजाति , नस्ल , लिंग , उम्र तथा आहार के आधार पर इसका प्रभाव कम ज्यादा हो सकता है । बतखें व चूजें सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं । यह शरीर में सबसे ज्यादा लिवर को नुकसान पहुंचाता है जिससे पशु पक्षी की मौत भी हो सकती है । कुत्तों में लिवर गल जाता है तथा आकार में भी बहुत बड़ा हो जाता है ।

एफ्लाटॉक्सिकोसिस का लक्षण क्या है । SYMPTOMS OF AFLATOXICOSIS

  • भूख कम लगना , पशु की ग्रोथ रेट रूक जाना , दूध में कमी ।
  • सुस्ती , दस्त में ब्लड निकलना , कमजोरी , एनीमिया ।
  • भैंसों में पीलिया तथा गायों में दिमागी लक्षण ।
  • अंधापन , गोल घेरे में चलना , तड़फना , दीमागी लक्षण ।
  • कुत्तों में एसाइटिस ( पेट में पानी भर जाना ) तथा अधिक मृत्यु दर ।

एफ्लाटॉक्सिकोसिस का डायग्नोसिस कैसे करें । DIAGNOSIS OF AFLATOXICOSIS

  • हिस्ट्री – सड़ा – गला , फंगस लगा हुआ आहार खाना ।
  • लक्षण व लेबोरेट्री जांच द्वारा ।

एफ्लाटॉक्सिकोसिस का उपचार । TREATMENT OF AFLATOXICOSIS

शरीर में फंगस द्वारा पैदा किया जाने वाले एक्लाटॉक्सिन के असर को कम करने की कोशिश करनी चाहिए वह इस तरह की जा सकती है ।

  • पशु आहार में लिवर टॉनिक , प्रोटीन व मिथायोनिन दें ।
  • पशु को दिए जाने वाले चारे दाने को 2-3 दिन तक धूप में रखें ।
  • Antifungal agents- प्रोपायोनिक एसिड , केल्शियम प्रोपायोनेट Dose – 2-8 kg / ton आहार में मिलाकर दें ।

एफ्लाटॉक्सिकोसिस का रोक थाम क्या है । CONTROL OF AFLATOXICOSIS

  • एफ्लाटॉक्सिन का पूरी तरह खात्मा मुश्किल है ।
  • पशु को जांच परख कर आहार दें ।
  • चारा दाना को वैज्ञानिक ढंग से कांटे , सुखाएं तथा भंडारित करें ।
  • चारा दाना के ट्रांसपोर्टेशन के समय विशेष ध्यान रखें ।
  • समय समय पर पशु आहार की क्वालिटी की जांच कराएं।

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