पशुओं में आफरा (RUMINAL TYMPANY) का कारण, लक्षण एवं उपचार Treatment of animals RUMINAL TYMPANY

आफरा या टिम्पेनी क्या है ?

रूमन ( rumen ) में अधिक मात्रा में गैस इकट्ठी हो जाना आफरा या टिम्पेनी कहलाता है। हल्की टिम्पेनी अधिक नुकसान नहीं करती है , पशु इससे उबर भी जाता है लेकिन तेज , गंभीर टिम्पेनी जानलेवा हो सकती है । इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए इसका इलाज कुशलता व फुर्ती से करना चाहिए अन्यथा पल भर में पशु मौत के मुंह में चला जाता है और पशुपालक को भारी आर्थिक नुकसान होता है । हालांकि आफरा या टिम्पेनी सभी पालतू रूमिनेन्ट पशुओं में होती है , लेकिन गाय – भैंस में तो सबसे अधिक होती है ।

पशुओं में आफरा (RUMINAL TYMPANY) का कारण ( ETIOLOGY ) क्या हैं?

( 1 ) Primary ruminal tympany – यह टिम्पेनी ruminal contents के अधिक किण्वन ( fermentation ) से होती है ।

  • अधिक मात्रा में हरा चारा खाना ।
  • अधिक मात्रा में फलीदार , दाल पौधों ( leguminous ) को खाना ।
  • अधिक मात्रा में फलियां , दालें , बरसीम , रिजका , गोभी , आलू खाना ।
  • आहार में सूखे चारे – दाने की मात्रा हरे चारे से कम होना यानी आहार में रेशेदार भाग ( fibrous food ) कम होना । अधिक मात्रा में साबूत व सूखा दाना ( dry grains ) खाना ।
  • अधिक या बारीक पिसा हुआ आहार खाना , जैसे – आटा ।
  • कुछ विशेष प्रकार की घास व पौधे में Pectin , Protein , Saponins , Toxins आदि पैदा होता है जो रूमन की pH को बदल कर झागदार आफरा ( frothy bloat ) की स्थिति पैदा करते हैं ।
  • पाचन क्रिया के आधार पर कुछ गाय , भैंसों में अक्सर आफरा होता है जबकि कुछ में कभी – कभी ।

( 2 ) Secondary ruminaltympany- रूमन में सामान्य तौर पर हल्की गैस बनती है । यदि शरीर से बाहर निकलने के मार्ग में कोई रूकावट ( obstruction ) आती हैं तो secondary ruminal tympany होती है । यह निम्न कारणों से हो सकती हैं ।

  • चोक ( choke ) – किसी गेंद , आलू , गोभी , चारे के गोले आदि का इसोफेगस में फंस जाने से रूकावट आ जाना ।
  • इसोफेगस के मार्ग का संकरा हो जाना ( stenosis )
  • इसोफेगस के बाहर की ओर से किसी ट्युमर , लिम्फ ग्लेण्ड में सूजन आदि के कारण दबाव पड़ना ।
  • Diaphagmatic hernia ( D.H. ) यह भैंस में आमतौर पर होता है जिसमें कमजोर डायाफ्राम पर लगातार दबाव व रगड़ से छेद होने से रेटिकुलम का कुछ भाग थॉरेसिक केविटी में घुस जाता है । दबाव के कारण रूमन में लगातार गैस बनती रहती है। भैंसों में अधिक मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण डी.एस. है ।
  • Traumatic reticulitis – कोई भी फॉरेन बाडी रेटिकुलम से निकलकर आगे बेगस नर्व पर दबाव डालती है ।
  • Obstruction of cardia – इसोफेगस का वह भाग ‘ जो स्टोमक में खुलता है उसे कार्डिया कहते हैं । इसमें कोई रूकावट आने से गैस बनती है ।
  • Ruminal atony – रूमन के सामान्य रूप से नहीं सिकुड़ने व फैलने से गैस बनती है ।
  • Vagus indigestion – के कारण इसोफेगस में गड़बड़ी व गैस बनना ।
  • Unusual posture – पशु का काफी देर तक एक ही ओर लेटे रहने से hypostatic pressure पड़ता है जिससे टिम्पेनी होती है ।
  • Worm infestation -अन्तः परजीवी कीड़ों के कारण भी आफरा रहता है ।

टिम्पेनी या आफरा से पशु की मौत क्यों होती है ?

  • गंभीर टिमपेनि में रूमन के अंदर का दबाव छः गुना अधिक हो जाता है । इसका आकार काफी बढ़ जाता है । इसकी वजह से डायाफ्राम व फेंफड़ों पर जबरदस्त दबाव पड़ता है । सांस की गति काफी बढ़ जाती है , फेफड़े पिचक से जाते हैं । सांस सामान्य नहीं होने से शरीर के विभिन्न भागों को ऑक्सीजन सप्लाई बहुत कम हो जाती है , और इस प्रकार asphyxia से मौत हो जाती है ।
  • थॉरेसिक केविटी पर रूमन का दबाव पड़ने से केविटी में स्थित हार्ट की स्थिति भी बदल जाती है । इसके नॉर्मल फंक्शन में भारी बाधा आ जाती है और हार्ट फैल हो जाता है , मौत हो जाती है ।
  • रूमन में अधिक फर्मेन्टेशन या अधिक सड़न ( putrification ) से जो जहरीली गैसें व अन्य तत्व बनते हैं जैसे- CO . , H , S , amine , amides आदि इन जहरीली गैसों का भारी मात्रा में ब्लड में जाने से toxaemia होता है । जो मौत का कारण बनता है ।
  • इस प्रकार गंभीर टिम्पेनी में पशु की मौत respiratory failure , cardiac failure तथा toxaemia के कारण होती है ।

पशुओं में आफरा (RUMINAL TYMPANY) का उपचार (TREATMENT) क्या है ?

1.First aid treatment

  • इलाज का पहला कदम ही रूमन की गैस को कम करने तथा उसे और नहीं बनने देने के लिए होना चाहिए ।
  • यदि संभव हो तो पशु के मुंह में एक लकड़ी आड़ी डालकर बांध दें , जैसे कि घोड़े के मुंह में मोहरा डालते हैं । इससे गैस बाहर आने में सुविधा होगी और बार – बार मुंह नहीं हिलाने से लार बाहर गिरने की बजाए अंदर ही जाएगी , जो गैस बनना कम करती है ।
  • ध्यान रहे tympany के दौरान पशु को चारा – पानी कतई नहीं दें ।
  • यदि संभव हो तो पशु को ऐसा खड़ा रखें कि पिछले वाला भाग नीचे व अगला भाग ऊंचाई पर हो ताकि डायाफ्राम व फेंफड़ों पर कम दबाव पड़े ।
  • स्टोमक ट्यूब या प्रोबेंग पास करें ताकि गैस बाहर आ सके और यदि इसोफेगस में कोई रूकावट भी हो तो वह दूर हो सकती है ।

2 Medical treatment

  • यदि टिम्पेनी कम या हल्की ( mild tympany ) है तो गैस को कम करने वाली Antizymotic दवा पिलाएं । ध्यान रहे कि तारपीन तेल को अकेला नहीं पिलाएं बल्कि मीठे तेल में मिलाकर पिलाएं । Turpentine oil 30 ml + Simple sweet oil 400-500 ml
  • यदि गंभीर टिम्पेनी है तो सर्वप्रथम 2-3 मोटी निडल्स को रूमन में पास करें । इन निडल्स के आस पास दोनों हथेलियों से दबाकर गैस निकालें । इससे काफी फर्क पड़ता है , कुछ ही समय में गैस कम हो जाती है , और पशु की बैचेनी कम हो जाती है । इन निडल्स को लगी रहने दें ताकि कोई दवा भी इसी में से सीधे रूमन में डाल सकें ।
  • गंभीर टिम्पेनी में पशु को मुंह द्वारा ड्रेचिंग नहीं करें बल्कि तारपीन का तेल व मीठा तेल मिलाकर रूमन पर लगी निडल्स के जरिए सीधे रूमन में डालें । इनके लिए 50 ml . की सिरिंज का प्रयोग उपयुक्त रहता है और जल्दी ही रूमन में दवा डाली जा सकती है ।
  • रूमन में बैक्टीरियल फर्मेन्टेशन को रोकने के लिए निडल्स के द्वारा सीधे ही एंटीबायोटिक्स ( टेट्रासाइक्लिन ) डाली जा सकती है ।
  • टिम्पेनी की कैसी स्थिति में ट्रोकार केल्युला का प्रयोग करें ?

प्रायः ऐसी स्थिति बहुत कम आती है कि मोटी ट्रोकार केन्युला का प्रयोग करें । इसका प्रयोग यदि लापरवाही व अकुशलता से किया जाए तो परेशानियां कम होने की बजाय बढ़ जाती है । इससे रूमिनल फिस्चुला , पेरिटोनाइटिस , एम्फाइसिसा आदि हो जाते हैं इसलिए गंभीर टिम्पेनी में 2-4 लम्बी मोटी निडल्स से ही गैस बाहर निकालनी चाहिए । यदि आपात स्थिति में ट्रोकार केन्युला प्रयोग करने की जरूरत पड़े तो यह स्टेनलेस स्टील का व छोटे आकार का होना चाहिए । Tetracycline 10-20 , V / M , IN या Inj . Penicillin – 40lac I / M

पशुओं में आफरा (RUMINAL TYMPANY) का injection , एंटीबायोटिक क्या है ?

  • रूमन में हिस्टामिन बनते हैं जो ब्लड में भी चले जाते हैं इसलिये इसमें Inj . Antihistamine 10mII / M अवश्य दें ।
  • यदि झागदार टिम्पेनी है तो Bloatosil – 100 ml . I / Ruminal .
  • Inj.Calcium borogluconate – 100 ml . S / C or I / V यह रूमन मांसपेशियों की गतिविधियां बढ़ाता है ।
  • Inj . B.Complex for 5 days , Rumen tonics for 10 days

पशुओं में आफरा (RUMINAL TYMPANY) का होम्योपैथीक दवा क्या है ?

  • कोलोसिन्थिस ( Colocynthis ) – जब टिम्पेनी अधिक मात्रा में हरा चारा खाने से हो तो दस बूंद हर दस – पन्द्रह मिनट बाद दे तथा लक्षण कम होने पर दो – तीन घंटे बाद जरूरत के अनुसार दें ।
  • कोलचिकम ( Colchicum ) – तेज , गंभीर व एक्युट टिम्पेनी में , हर पन्द्रह मिनट बाद पांच – छ : बार दें ।
  • एंटिमोनियम क्रुडम ( Antimonium Crudum ) – टिम्पेनी की शुरूआती अवस्था में इसे उपयोग करें । हर बीस मिनट बाद पांच – छ : बार दें ।
  • नक्सवोमिका ( Nuxvomica ) – हर बीस मिनट बाद पांच – छ : बार दें ।
  • एपोसाइनम ( Apocyanum ) – जब पेट अधिक फूला हुआ हो , दस बूदं दिन में पांच बार दें ।
  • लाइकोपोडियम ( Lycopodium ) – आंतों में हवा का गोला बना हो । आंतों का फूल जाना या आंत के आगे सूखे गोबर की वजह से रूकावट हो । दस बूंद दिन में चार बार दें ।

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