अतिसार एवं संग्रहणी का आयुर्वेदिक , घरेलू तथा यूनानी चिकित्सा द्वारा उपचार ।

अतिसार किसे कहते हैं ?

पतले और बदबूदार दस्त होना अतिसार कहलाता है । यह अधिकांशतः दूषित जल के कारण होता है । या दूषित विषेले भोजन के कारण होता है । इसमें पेट में दर्द , मरौंड , ऐंठन होती है और कभी गाढा या पतला दस्त होता है । गैस भी बनती है । पसीना भी आता है तथा हरारत भी रहती है ।

संग्रहणी किसे कहते हैं?

अतिसार रोग हो जाने के पश्चात ही चिकित्सा न होने पर संग्रहणी रोग हो जाता है । इसमें संग्रहणी नाम कला का है वह संग्रहणी कला अग्नि मंद कर खाये हुए आआहार को कच्चा ( विना पका हुआ ) तथा पके हुए को पतला कभी गाढ़ा बाहिर निकालती रहती है । इसी का नाम संग्रहणी है ।

अतिसार एवं संग्रहणी का घरेलू उपचार :-पेट दर्द का होम्योपैथिक उपचार । Homeopathic treatment for stomach pain

  1. दही के साथ ईसबगोल की भुसी लेने से अतिसार दूर होता है ।
  2. पुदीने का रस लेने से काफी लाभ मिलता है ।
  3. छोटी पीपल का चूर्ण और थोडा काला नमक मिलाकर शहद के साथ लेने से आराम मिलता है ।
  4. तेजपात के पत्ते + दालचीनी + 1/4 मात्रा कत्था का काढ़ा बनाकर पिलाने से दस्त तुरन्त बन्द होते हैं ।
  5. भुने हुए जीरे का चूर्ण दही के साथ खिलायें । आराम मिलता है ।
  6. अदरक , कच्चेबेल का गूदा और गुड मिलाकर मट्टे के साथ पीने से लाभ होता है ।
  7. बबूल के पत्तों का रस या जायफल खाने से अतिसार में लाभ मिलता है ।
  8. चावलों का मांड तथा थोड़ा काला नमक और जरा सी भुनी हींग मिलाकर पीने से दस्त में लाभ मिलता है ।
  9. आँवला पावडर + वंसलोचन + छोटी इलायची + धनियाँका बराबर मात्रा में लेकर पावडर बना लें उसमें आवश्यकतानुसार मिश्री मिलाकर सुबह – शाम एक – एक चम्मच पानी के साथ लें , आराम मिलेगा ।
  10. बड़ का दूध नाभी पर लगाने से दस्त में आराम मिलता है ।
  11. मिश्री और शहद मिलाकर चाटने से दस्त बन्द हो जाते हैं ।
  12. चूने के पानी में मिश्री मिलाकर पीने से दस्त बंद होते हैं ।
  13. गाय के दूध के दही में पाँच – छः खजूर मिलाकर खाने से लाभ होता है ।
  14. अफीम और केसर को मधु ( शहद ) मे घिस कर एक चावल भर देने से सब प्रकार का अतिसार तथा संग्रहणी मिटती है ।
  15. 20 ग्राम काली मुसली के चूर्ण को , गाय के दही में मिलाकर थोडा काला नमक मिलाकर खाने से बीमारी में लाभ मिलेगा ।
  16. 10 दाने तुलसी के बीज पीसकर गाय के दूध के साथ लें ।
  17. पित्त की संग्रहणी मिटाने के लिये गाय की छाछ में शक्कर मिला पिलाना चाहिये ।
  18. छाछ में सोंठ , मिर्च , पीपल और सेंधा नमक मिला पिलाने से कफ और वादी की संग्रहणी मिटती है ।
  19. एक ग्राम खाने का सोडा दिन में तीन बार लेनेसे अतिसार में आराम मिलता है ।
  20. एक कप पानी में दो चम्मच जीरा उबालकर उसे छानकर पानी पीने से लाभ मिलता है ।
  21. एक चम्मच पिसी अजवायन से पावडर में जरासे काले नमक को मिलाकर गर्म पानी के साथ लें ।
  22. 25 ग्राम नीम की कोमल पत्तियाँ चार लोंग + चार पाँच काली मिर्च और एक चुटकी हीरा हींग मिलाकर दो बार गरम पानी पी लें ।
  23. पीपल तथा सौंठ को समान मात्रा में लेकर गुड़ या चीनी के साथ लेने से लाभ मिलता है ।
  24. दो हरड़ + चार लोंग का काढ़ा बनाकर एक चुटकी सैंधा नमक मिलाकर सेवन करने से अतिसार में लाभ मिलता है ।
  25. पिसी हुयी हल्दी तवे पर भूनकर उसमें थोडा काला नमक मिलाए और एक चम्मचठंडे पानी के साथ सुबह , दोपहर , शाम पिलाएं। आराम मिलेगा ।
  26. जामून में आम की गुठली का चूर्ण तथा एक हरड़, इन तीनों को मिला कर चूर्ण बनाएं और एक – एक चम्मच सादे पानी के साथ सेवन करें ।
  27. थोडी सी सौंफ तवे पर भूनकर उसका पावडर बनाकर मट्टे के साथ लें ।
  28. मासा भांग को भून कर ३ मासा शहद के साथ चाटने से संग्रहणी दूर होती है ।

अतिसार एवं संग्रहणी का आयुर्वेदिक उपचार :- कब्ज़ ( Constipation ) का होम्योपैथिक दवाएं

  1. बबूल के पत्तों का रस पीने से हर प्रकार के कठिन तथा भयानक दस्त ठीक हो जाते हैं।
  2. प्याज को कूटकर रस निकाल लें , फिर उसमें थोड़ी – सी अफीम मिलाकर सेवन करने से अतिसार में अवश्य लाभ होता है ।
  3. आम की पुरानी गुठली की मींगी तथा भुनी हुई सौंफ – इन दोनों को समभाग लेकर कूट – छानकर चूर्ण बनालें । इस चूर्ण को 6-6 माशे की मात्रा में प्रातः सायं पानी के साथ सेवन करने से हर प्रकार के दस्त बन्द हो जाते हैं।
  4. अजमोद , मोचरस , सोंठ और धाय के फूल – इन चारों को समभाग लेकर कूट – पीसकर कपड़छन करलें । 6-6 माशे चूर्ण प्रातः सायं गाय के मढे के साथ लेने से हर प्रकार के दस्तों में आराम होता है ।

अतिसार एवं संग्रहणी का यूनानी चिकित्सा से उपचार :-

  1. बीज सहित मुनक्का 7 अदद , आम की गुठली की मींगी 1 अदद अफीम 5 रत्ती – इन सबको कूट – पीसकर , पानी के साथ 7 गोलियाँ बनालें । प्रतिदिन एक गोली खाते रहने से दस्त बन्द हो जाते हैं ।
  2. ताजा बेलगिरी को 2 तोले की मात्रा में भूनकर खाने से दस्त बन्द हो जाते हैं ।
  3. अफीम 3 माशा , अकरकरा 7 माशा , हुब्बुल्लास 14 माशा , सामक 14 माशा तथा झाऊ के फल 14 माशा – इन सबको खरल में डालकर , बबूल के रस में घोटें तथा 1-1 माशे की गोली बनाकर सेवन करें । इससे 1 घण्टे के भीतर ही दस्त बन्द हो जाते हैं ।
  4. करेले के पत्तों का स्वरस 3 माशा , अनार के पत्तों का स्वरस 3 माशा तथा बकरी का दूध 1 तोला इन सबको मिट्टी अथवा पत्थर के बर्तन में मिलाकर रखें । इसमें रुई का फाहा भिगो – भिगोकर नाभि पर रखने से हर प्रकार के दस्तों में लाभ होता है ।

कब्ज़ ( Constipation ) का होम्योपैथिक दवाएं

कब्ज का घरेलू एवं आयुर्वेदिक ईलाज

Leave a Reply

Your email address will not be published.