अढैया बुखार { EPHEMERAL FEVER } के लक्षण , कारण तथा उपचार एवं होम्योपैथिक दवाएं

Synonyms :- Three day Sickness, Bovine epizootic fever , Dengu fever ( human ) .

अढैया बुखार { EPHEMERAL FEVER } क्या है ?

यह एक संक्रामक ( contagious ) वाइरल रोग है जिसमें तेज फीवर के साथ जोड़ों व मांसपेशियों में सूजन , अकड़पन , कंपकंपाहट तथा लंगड़ापन हो जाता है । कुछ ही दिनों में स्वतः ही पशु रोग से ठीक हो जाता है । बहुत कम पशुओं में रोग जटिल होने से मौत होती है ।

यह प्रमुख रूप से गायों का रोग है । भैंसों में भी हो सकती है लेकिन भेड़ , बकरियों व कुत्तों में नहीं पाया जाता है । यह एक विशेष प्रकार की मक्खी ( sand fly ) के द्वारा फैलता है तथा दुनिया के सभी भागों में पाया जाता है । गोपशुओं में छ : माह से कम उम्र वाले बछड़े व बछड़ियों में रोग होने की संभावना कम रहती है । जबकि व्यस्क पशुओं में रोग अधिक होता है । अधिक हष्टपुष्ट गाय व बैल रोग की चपेट में अधिक आते हैं ।

अढैया बुखार { EPHEMERAL FEVER } किसके कारण होता है ?

ETIOLOGY – Virus – Rhabdovirus

यही वाइरस मनुष्य में डेंगू फीवर ‘ का कारण होता है । एक बार रोग हो जाने पर उस पशु में लगभग दो वर्ष के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बन जाती है । इसलिए इस रोग का प्रकोप भी एक वर्ष छोड़कर अगले वर्ष होता है ।

अढैया बुखार { EPHEMERAL FEVER } रोग फैलता कैसे है ?

TRANSMISSION :-

प्रायः यह रोग गर्मी के नमी वाले दिनों में या बरसात की शुरूआत के दिनों में होता है । चूंकि यह एक विशेष मक्खी ( sand fly ) द्वारा एक से दूसरी जगह पर फैलता है इसलिए इन दिनों में ये प्रजनन कर काफी संख्या में व द्धि कर लेती है । इसके अलावा मच्छर भी रोग फैलने में सहायक होते हैं । रोगी पशु के सीधे सम्पर्क या इसके डिस्चार्ज के सम्पर्क में आने से रोग नहीं फैलता है । हवा के जरिए भी वाइरस लम्बी दूरी तक पहुंच जाते हैं ।

अढैया बुखार { EPHEMERAL FEVER } रोग कैसे उतपन्न होता है ।

PATHOGENESIS :-

एक बार इन्फेक्शन हो जाने के बाद लगभग पांच दिन तक गाय के ब्लड में वाइरस मौजूद रहते हैं । इसी दौरान सेन्ड फ्लाई या मच्छर रोगी को काटते समय ब्लड के साथ वाइरस अपने शरीर में खींच लेते हैं । इनके द्वारा चूसी हुई एक बूंद ब्लड में मौजूद वाइरस भी रोग पैदा करने में सक्षम होते हैं । रोग से उबरने के बाद उस गाय के शरीर में ये वाइरस नहीं रहते हैं । Rhabdo Virus → Host animal + Multiply in blood → Viraemia- → Virus localises in the musodermal tissue like Joints , muscle and lymph nodes Inflammation of muscle and joints- > Fever Pain in leg . Limb stiffness

अढैया बुखार { EPHEMERAL FEVER } के कौन – कौन लक्षण हैं ?

SYMPTOMS :- इन्क्युसुवेशन पीरियड- 2-3 दिन ( Three day sickness )

पहला दिन :-

  • एकाएक तेज फीवर ( 105-107 डि.फा .. ) दूध में कमी ।
  • खाना बंद , जुगाली नहीं करना , कब्ज , लकिन कभी – कभी दस्त ।
  • आंखों व नाक से पानी जैसा डिस्चार्ज ( watery nasal discharge )
  • हल्की खांसी , पशु बार – बार सिर हिलाता है ( head shaking )
  • पैरों में कमजोरी , मांसपेशियों में कंपकंपाहट ( muscular shivering )
  • तेज सांस व तेज हार्ट रेट ( respiration and heart rate )

दूसरा दिन :-

  • पैरों में गंभीर अकड़पन ( stiffness ) आ जाता है । कभी एक पैर तो कभी दूसरे पैर को बारी बारी से उठाता है ।
  • पैर में अकड़ के कारण पशु खड़ा भी नहीं रह पाता है । ( severe lameness ) तथा जमीन पर लेटकर भी पैर को सीधा रखता है ।
  • पशु अधिकतर खड़ा ही रहता हैं , जिसमें पिछला पैर शरीर से दूर तना हुआ रखता है । मुंह को फ्लेंक की ओर मोड़कर रखता है । जब पशु बैठ जाता है तो बैठने की स्थिति बिल्कुल मिल्क फीवर जैसी ही होती है ।

तीसरा दिन :-

  • पशु ठीक होने लगता है तथा कुछ खाना शुरू करता है ।
  • हालांकि 3-5 दिन में पशु फिर से ठीक हो जाता है , लेकिन कुछ में हल्का लंगड़ापन ( lameness ) रह सकता है ।
  • इस रोग से ठीक होने के बावजूद कुछ कॉम्पलीकेशन हो सकते हैं , जैसे दूध में कमी , न्युमोनिया , आर्धाइटिस ( knee , hock joint ) यदि पशु अधिक दिन बैठा ही रहे तो मौत भी हो सकती है ।
  • कुछ पशुओं में गंभीर स्थिति में तीन सप्ताह तक रोग के लक्षण रह सकते हैं , लेकिन जब एक बार पशु कुछ खाना शुरू कर देता है , गोबर भी सामान्य करने लगता है तो उम्मीद हो जाती है कि पशु फिर से ठीक हो जाएगा ।

अढैया बुखार { EPHEMERAL FEVER } का उपचार क्या है ?

TREATMENT :-

  • कोई विशेष ट्रीटमेन्ट नहीं – Symptomatic treatment दें ।
  • पहला दिन – Antipyretic injection . दें । Antibiotic – Tetracyclien I / V or I / M
  • दूसरा दिन – Analgesic and Antiinflammatory दें । Dexamethazone , यदि प्रेग्नेन्ट नहीं है तो ।
  • तीसरा दिन Antibiotic , Phenylbutazone दें । Inj . Vit B complex with liver extract . Stomachic , calcium borogluconate
  • चौथा दिन यदि आाइटिस है तो – Hostacortin + Penicillin Locally inject in joint .

अढैया बुखार { EPHEMERAL FEVER } का रोक थाम कैसे करें ?

CONTROL :-

चुंकि यह विशेष प्रकार की मक्खी ( sand fly ) से फैलता है इसलिए इसका नियंत्रण करें , लेकिन यह एक काफी मुश्किल काम है । पशु बाड़े की अच्छी सफाई रखें । एफिमरल फीवर का कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है ।

अढैया बुखार { EPHEMERAL FEVER } की होम्योपैथीक Homeopathic दवाएं :-

  1. एकोनाइट ( Aconitum ) :- रोग की शुरूआती अवस्था में जब हल्का बुखार हो तो हर आधा घंटे बाद पांच बार दें ।
  2. ब्रायोनिया ( Bryonia ) :- सांस तेज चले , हार्ट रेट अधिक हो तो हर दो घंटे बाद पांच बार दें ।
  3. आर्सेनिक 1000 ( Arsenicum 1M ) :- यदि आखों व नाक से डिस्चार्ज हो , सांस तेज चलती हो तो दिन में चार बार तीन दिन तक दें ।
  4. नक्सवोमिका 1000 ( Nuxvomica 1M ) :- जब पशु चारा – पानी नहीं ले रहा हो , जुगाली नहीं कर रहा हो तो दिन एक बार सप्ताह भर तक दें ।
  5. स्ट्रिकनिन 6 ( Strychnine 6 ) :- यह मांसपेशियों की ऐंठन , अकड़न , कंपकंपाहट रोकता है । दिन में तीन बार तीन दिन तक दें ।
  6. कुप्रम मेटालिकम 1000 ( ( Cuprm Met . 1M ) :- मांसपेशियों की ऐंठन के साथ नर्वस सिस्टम के लक्षण हो तो दिन में एक बार तीन दिन तक दें ।

गाय, भैंस के थानों से दूध नहीं आना ( AGALACTIA ) का होम्योपैथिक दवा

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