नाखूना (अंगुलबेढ़ा) का होमियोपैथिक उपचार उपचार। Homeopathic medicine for whitlow

परिचय-

जब यह रोग हो जाता है तो इसके कारण से हाथ की अंगुली या अंगूठे के नख के पास का भाग पक जाता है और अधिक परेशानी होती है। जब यह स्थान पकने लगता है तब रोगी को बहुत अधिक कष्ट होता है। धीरे-धीरे पकते-पकते यह फूट जाता है और अगर नहीं फूटता है तो रोगी को असहनीय दर्द होता है। यदि इस रोग का उपचार ठीक समय पर करे तो यह रोग ठीक हो जाता है।

कारण :-

नाखून अधिक छोटा कटवाने, किसी प्रकार से नाखून पर चोट लगने, अंगुली जल जाना या कोई विषैली चीज खून में मिलने के कारण से यह रोग होता है।

नाखूना (अंगुलबेढ़ा) का होमियोपैथिक उपचार :–

• रोग की प्रथमावस्था में जब हल्की लाली हो , पूर्णरूप से मवाद न बना हो तो इसका प्रयोग लाभप्रद है – बेलाडोना ( Belladonna ) 30 , दिन में 3 बार

• मवाद भर जाने के बाद इस दवा का प्रयोग करें , अवश्य ही लाभ होगा – साइलीशिया ( Silicea ) 30 , दिन में 3 बार

• जब पूर्णरूप से मवाद न बना हो तो इस दवा का 200 शक्ति ( सुबह – शाम ) में प्रयोग करें , इससे फोड़ा बिना पके ही बैठ जायेगा । अगर पकने की अवस्था में हो तो इस दवा को 3x शक्ति ( दिन में 3 बार ) में प्रयोग करें , इससे फोड़ा पककर फूट जाएगा – हिपर सल्फर ( Hepar sulphur ) 3x , 200

नाखूना (अंगुलबेढ़ा ) घरेलू चिकित्सा :-

घाव में पीब हो जाने पर पीब को अच्छी तरह से निकालकर उपचार करना चाहिए।
जब तक घाव अच्छा न हो जाए तब तक कैलेण्डुला के धोवन से अंगुली को धोते रहना चाहिए।
अंगुली या अंगूठे की पकने की अवस्था में छोटे बैगन में या कागजी नींबू में छेदकर अंगुली पर टोपी की तरह पहना देने से परेशानी दूर होती है।
यदि कई प्रकार के उपाय करने के बाद भी अंगुलबेढ़ा रोग से आराम न मिले तो नीम की गर्म पट्टी बांधनी चाहिए।
रोगी को अपने हाथ इस प्रकार से बांधकर रखना चाहिए कि हाथ को हिलाने-डुलाने पर अंगुलियां नीचे की ओर न झुक पाएं।

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